भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘हमारे अटल प्यारे अटल’ कवि सम्मेलन में देश के प्रख्यात कवियों ने काव्यांजलि अर्पित की। इस अवसर पर देश के प्रख्यात कवि बलवीर सिंह करुण अलवर को 2024 एवं कवियित्री डॉ. कीर्ति काले को 2025 का अटल कवि सम्मान प्रदान किया गया। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न अटलजी का स्मरण करते हुए कहा कि वे राजनीति के अजात शस्त्रु थे। उनमें विचारों की दृढ़ता भी अद्वितीय थी। अटल जी ने अपने दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप ही पोखरण परमाणु विस्फोट कर सारी दुनिया को अचंभित कर भारत का मान बढ़ाया था। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को सही मायने में अपनाया था। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अटल जी की प्रसिद्ध कविताएं ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा’ एवं ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ का पाठ कर अपने उद्बोधन को विराम दिया। आरंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य अतिथियों ने अटल जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। देश के जाने माने कवियों ने किया कविता पाठ
प्रख्यात कवि बलवीर सिंह करुण ने काव्यपाठ कर कहा ऐसा लगा कि अम्बर से ध्रुव तारा जैसे टूट गया। निर्दोष धरा से बिना बात सहसा ज्यों बादल रूठ गया। छत कहां उड़ गई अकस्मात् दीवारें ठगी-उगी सी हैं। पुतलियां कौन ले गया, चुरा आंखें यों डरी-डरी सी हैं। सुमित ओरछा ने कवि पाठ करते हुए कहा कि भारत में गौरव ग्रंथ की रक्षा हो धर्म सनातन की, हर पंत की रक्षा हो ऐसा एक बटन दबाना तुम संत की रक्षा हो।
इसके साथ ही कवि अमन अक्षर ने यह समय एक अनूठा उपन्यास है जिसमें अपना ही होना अनायास है, कि प्यास का यह सफर बड़ी दूर का.. जबकि घर तो नदी के बहुत पास है। पढ़कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। इसके अलावा प्रख्यात कवि अतुल अजनबी ने कवि बस एक मां ही है मेरी राह देखे हैं यहां किसी का कौन इंतजार करता है पढ़कर सभी को भाव विभोर कर दिया।


