मेला शुभारंभ के बाद दूसरे रविवार को मेले में जोरदार भीड़ उमड़ी, लेकिन मेले की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त रही। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए थे। एक पाठक ने भास्कर को तस्वीरें साझा की और लिखा…‘मेले का हाल बेहाल। अत्याधिक गंदगी है, जिसे देख कर दुख हुआ। मेला, जो अपनी भव्यता और विरासत के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की गंदगी और अव्यवस्था का होना दुखद है। वाहनों की हवा निकालने पर पार्किंग ठेकेदार को 5 हजार रुपए का मामूली जुर्माना, फिर अवैध वसूली के लिए छोड़ा पार्किंग स्टैंड में जगह न मिलने पर सैलानियों ने बाहर गाड़ियां खड़ी कर दी थीं। जिनकी हवा पार्किंग ठेकेदार के कर्मचारी द्वारा निकाल दी गई। भास्कर ने 4 जनवरी को यह खबर प्रकाशित की थी। जिसपर मेला प्राधिकरण ने पार्किंग ठेकेदार पर सिर्फ 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई नाकाफी है। क्योंकि ठेकेदार के हौसले इतने बुलंद हैं, कि रविवार को भी वह वाहन पार्किंग के लिए 40 के बजाय 50 रुपए लेता रहा। जानकारों का कहना है कि जुर्माने की राशि इतनी कम है कि ठेकेदार उसे चंद घंटों की अवैध वसूली से वसूल लेता है। अवैध वसूली पर करने थी कार्रवाई, जिम्मेदार दे रहे सिर्फ चेतावनी कार और बाइक पार्किंग का ठेका सतेंद्र तोमर को दिया गया है। पार्किंग संचालन की गलत गतिविधियों के लिए उनपर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। 20 व 40 रुपए से अधिक वसूली न हो, इसके लिए टीन के बोर्ड पर पेंट से लिखवाने के लिए कहा है। क्योंकि पोस्टर-होर्डिंग फाड़ दिए जाते हैं। बिना रेट लिखी पर्ची भी बरामद की हैं। हमने सख्त चेतावनी दी गई है कि आगे ऐसा हुआ तो एफआईआर कराई जाएगी। साथ ही पार्किंग की ड्यूटी करने वाले लड़कों के मोबाइल नंबर समेत अन्य जानकारी भी प्राधिकरण में जमा कराने के लिए कहा है। सफाई के लिए सख्ती करेंगे, भीड़ में झाड़ू लगा पाना सफाई कर्मियों के लिए मुश्किल होता है। दुकानदारों के लिए डस्टबीन रखना अनिवार्य किया जाएगा, अन्यथा उनपर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। – सुनील त्रिपाठी, सचिव, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण


