घड़ियाल विभाग के अधीक्षक पर रिश्वतखोरी का आरोप:चार वीडियो वायरल, कार्रवाई नहीं होने पर उठ रहे सवाल

राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य विभाग के अधीक्षक योगेंद्र पारदे की रिश्वतखोरी से जुड़े चार वीडियो और कई ऑडियो सामने आने के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सीसीएफ और डीएफओ ने मामले की जांच कराने की बात कही थी, लेकिन 11 दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस पर जिले के समाजसेवियों और आम लोगों ने विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। क्या है मामला? 11 दिन पहले वायरल एक वीडियो में अधीक्षक योगेंद्र पारदे अपने अधीनस्थ वन कर्मियों से कह रहे थे कि, “नदी के घाटों से हर महीने 7 लाख रुपए आएगा। इसमें से मेरे पास 1.5 लाख बचेगा। सीसीएफ, डीएफओ और रेंजर को देना पड़ेगा। सबको हिस्सा देंगे, तभी काम चलेगा। मैं अकेला लेकर बैठूंगा तो काम नहीं चलेगा। दूसरे वीडियो में वह फोन पर बात करते हुए कह रहे थे, “जलालपुर और अन्य घाटों से 1-1 लाख रुपए दोगे तो रेत का काम चलेगा। रेत निकालने के गड्ढों को भरना पड़ेगा, नहीं तो पूरा सिस्टम खराब हो जाएगा।”तीसरे वीडियो में वह एक मंत्री को खुश करने के लिए मोटी रकम देने की बात करते हैं और गाली-गलौज भी करते हैं। चौथे वीडियो में वह रेत माफिया के ट्रैक्टरों को लेन-देन के आधार पर छोड़ने की बात करते दिख रहे हैं। इसके अलावा, एक ऑडियो में वह एक ग्रामीण को मगरमच्छों से कटवाने की धमकी दे रहे थे। एक अन्य बातचीत में वह नोटों के बंटवारे को लेकर वनकर्मी से गाली-गलौज करते सुनाई दिए। कोई कार्रवाई नहीं, उठ रहे सवाल इतने गंभीर आरोपों के बावजूद विभाग के आला अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इसे लेकर जिले के लोगों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। श्योपुर के समाजसेवी उमेश मीणा ने कहा कि अधीक्षक के रिश्वतखोरी के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं। उन्हें तुरंत निलंबित कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए थी। परंतु 11 दिन बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होना संदेह पैदा करता है। ऐसा लगता है कि डीएफओ और सीसीएफ को भी रिश्वत का हिस्सा मिलता है, जैसा कि वीडियो में कहा गया। श्योपुर निवासी बंटी वाल्मीकि ने कहा कि श्योपुर के लोग सीधे-साधे हैं, और इसी का फायदा अधिकारी उठा रहे हैं। रेत का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। वीडियो वायरल होने के बावजूद अधीक्षक पर कार्रवाई नहीं होना भ्रष्टाचार को दर्शाता है। श्योपुर निवासी मोहन राठौर ने कहा कि वीडियो में अधीक्षक साफ-साफ ₹7 लाख महीने की मांग और डीएफओ-सीसीएफ को हिस्सेदारी देने की बात कह रहे हैं। इस मामले में डीएफओ और सीसीएफ के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए। उनके बिना रेत का अवैध कारोबार संभव नहीं है। विभाग की सफाई राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य विभाग के सीसीएफ टीएस सुलिया ने कहा कि अधीक्षक से संबंधित वीडियो पर जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद हम शासन को रिपोर्ट सौंपेंगे। एक एसडीओ पर कार्रवाई का अधिकार हमारे पास नहीं है। कार्रवाई शासन स्तर से ही होगी।

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