रीवा जिले के शंकरपुर महेवा गांव के लोग इन दिनों डर और दहशत के साए में जीवन गुजार रहे हैं। वजह है गांव के पास चल रही क्रेशर मशीनों की ब्लास्टिंग, जिससे कभी भी पत्थर का टुकड़ा उड़कर किसी के घर या सिर पर गिर सकता है। प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ ग्रामीणों ने अब हेलमेट पहनकर और थाली बजाकर विरोध जताना शुरू किया है। उनका यह अनोखा विरोध सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ब्लास्टिंग से घरों में गिर रहे पत्थर, दरारें तक आ गईं ग्रामीणों का कहना है कि पास में चल रही क्रेशर यूनिटें मनमाने ढंग से ब्लास्टिंग कर रही हैं, जिससे पत्थर टूटकर घरों में गिरते हैं। कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं, और कच्चे घर गिरने की कगार पर हैं। लोगों को हमेशा यह डर सताता है कि कहीं कोई पत्थर सिर पर न गिर जाए, इसलिए कई लोग अब घरों के अंदर भी हेलमेट पहनकर रह रहे हैं। न इंसान सुरक्षित, न मवेशी स्थानीय निवासी अमन पटेल और रामलली पटेल ने बताया कि क्रेशर मशीनों से निकलने वाली धूल और धुआं लोगों की सांसों को भी दूषित कर रहे हैं। वहीं, ब्लास्टिंग की तेज आवाज से पशु भी डर जाते हैं, जिससे गांव का हर जीव असुरक्षित महसूस कर रहा है। सरकार की गाइडलाइन की उड़ रही धज्जियां ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्रेशर यूनिटों का संचालन शासन की गाइडलाइन के विपरीत किया जा रहा है। न तो पर्यावरण के मानकों का पालन किया जा रहा है, न ही सुरक्षा के। अनियंत्रित ब्लास्टिंग से लोगों की जान को खतरा बना हुआ है, लेकिन प्रशासन अब तक मौन है। ग्रामीणों की चेतावनी- छह महीने बाद गांव छोड़ देंगे ग्रामीण रंजीत पटेल का कहना है कि अगर जल्दी ही कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो छह महीने बाद गांव छोड़ना पड़ेगा। उनका कहना है कि वह बार-बार प्रशासन को जगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अनोखे तरीके से कर रहे विरोध प्रशासन की निष्क्रियता के बीच ग्रामीणों ने विरोध के अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके अपनाए हैं। कभी हेलमेट पहनकर, तो कभी थाली बजाकर, सोशल मीडिया के माध्यम से वे अपनी पीड़ा और डर को आवाज दे रहे हैं। मामले में जनपद पंचायत सीईओ ने बताया उन्हें अब इस समस्या की जानकारी मिली है। मामले की जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


