टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का पिछले 17 साल से हिस्सा रहे श्याम पाठक के लिए यह शो सिर्फ एक टीवी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की पहचान बन चुका है। जयपुर आए श्याम पाठक ने दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि पत्रकार पोपटलाल के किरदार ने उन्हें वह लोकप्रियता दी है, जिसकी वजह से आज घर से बाहर निकलते ही लोग उन्हें उनके असली नाम से कम और किरदार के नाम से ज्यादा पहचानते हैं। श्याम पाठक खुद हंसते हुए कहते हैं कि हालात ऐसे हो गए हैं कि अब तो डॉक्यूमेंट में नाम बदलना ही बाकी रह गया है। शो की जयपुर में चल रही शूटिंग, पतंग उत्सव की रौनक और अपने किरदार से जुड़े अनुभवों उन्होंने ये भी साझा किया कि इस शो ने उन्हें क्या-क्या दिया और क्यों पोपटलाल का किरदार उनके दिल के सबसे करीब है। रिपोर्टर: जयपुर में पतंगबाजी कर रहे हैं, वह भी साफा लगाकर, क्या खास है? श्याम पाठक: बहुत खास है, हम जयपुर के पतंग उत्सव में आए है, हमें पता लगा कि यहां पर पतंगों काे लेकर जबरदस्त उत्साह रहता है। हमारी स्टोरी बहुत मजेदार होने वाली है, आप यह शो जरूर देखिए, बहुत सारे ट्विस्ट आपको यहां मिलेंगे। आने वाले ट्विस्ट को तो आप सभी एन्जॉय करने वाले हैं। रिपोर्टर: आप जयपुर में अपनी शादी के लिए आए हैं और बबली की शर्त जो उसने पतंग काटने की लगाई है, उसे जीतने में लगे है, क्या इस बार आपकी शादी हो जाएगी? श्याम पाठक: अब तो तय है कि बबली की पतंग को पोपटलाल काटने वाले हैं। उन्हें दुल्हन बनाकर लेकर जाएंगे। पोपटलाल बहुत अच्छी पतंग उड़ाते हैं, ऐसे में मैं और मेरी टप्पू सेना यहां आई है और इस शर्त को जीतने वाले हैं। बबली को दुल्हन बनाकर गोकुलधाम लेकर जाने की तैयारी में लगे हैं। रिपोर्टर: काफी समय इस शो को दिया है, कितना कुछ इससे पाया है और कितना खास है आपके लिए? श्याम पाठक: मेरी जिंदगी का लम्बा शो रहा है। पिछले 17 साल से इस शो को कर रहा हूं। इस शो से मुझे बहुत कुछ हासिल हुआ है। दूसरी बात यह है कि हम निमित बने हैं कि जो दर्शक है, उनकी चेहरों पर मुस्कान ला सकें। असित मोदी का जितना शुक्रिया अदा करें वह कम है। क्योंकि वे इस शो के क्रिएटर हैं। हम सभी के किरदारों के जन्मदाता है। मैं 17 साल से कर रहा हूं और ऐसा लगता है कि अभी और भी मेहनत करनी है। नए जोश के साथ कहानी को दर्शकों तक पहुंचाना है। हमारी कोशिश है कि दर्शकों के चेहरे की मुस्कान को बरकरार रखा जा सके। रिपोर्टर: जब आप घर से बाहर निकलते हैं, एयरपोर्ट या कहीं इवेंट में तो आपको किरदार के नाम से पहचाना जाता है, इसे किस तरह देखते हैं? श्याम पाठक: ऐसा देखकर अच्छा लगता है। अब तो ऐसा लगता कि डॉक्यूमेंट में चेंज करना बाकी है, बाहर तो पोपटलाल का ही नाम चलता है। आपने सही कहा कि जो भी दर्शक पब्लिक प्लेस पर मिलता है तो वह किरदार के नाम से मुझे जानता है। अच्छा लगता यह देखकर। वैसे मैं पर्सनली तौर पर बताउं तो पोपटलाल से असल जीवन में श्याम पाठक बिल्कुल अलग है। इसलिए इस किरदार को निभाना भी खास रहता है, क्योंकि इसे करने में चैलेंज आता है। कैमरा ऑन होता है मैं पोपटलाल बन जाता हूं और इसे एन्जॉय करता हूं। रिपोर्टर: 17 साल पहले की बात करें तो आपके पास यह किरदार आया था तो आपने किस तरह हां भरी थी? श्याम पाठक: जब यह शो कंसीव हुआ था और मुझे असित का कॉल आया था। उस वक्त मैं कोई दूसरा शो कर रहा था, वहां पर बिजी था। जैसे ही इनका शो वायरल हुआ, एक हफ्ते में मुझे पोपटलाल के किरदार के लिए कॉल आ गया। मैंने इनसे मुलाकात की। ऑरिजनल लिटरेचर में पोपटलाल के किरदार में कुछ ऐसे चीजें थी जिसे टीवी पर नहीं दिखाना चाहते थे, क्योंकि हमारी ऑडियंस में बच्चे और बुजुर्ग दोनों है। हमने स्वभाव के अंदाज को पकड़ा और उसे अलग तरह से बनाया। उसके दिन की शुरुआत ही अखबार वाले से , दूधवाले से लड़ाई करने से होती है। पूरा दिन दुनिया हिला दूंगा, कैंसिल-कैंसिल करता रहता है, लेकिन दिल का बड़ा अच्छा है। इन्हीं चीजों काे पकड़ते हुए हमनें इस किरदार को बनाया। इश्वर की कृपा से हमें बहुत प्यार मिला और बड़ा मजा आया। रिपोर्टर: गुजरात और जयपुर की पतंगबाजी एन्जॉय की, क्या अलग लगा आपको? श्याम पाठक: गुजरात में तो कई बार पतंग महोत्सव का हिस्सा बने है। जयपुर में तो हम पहली बार आए हैं। यहां इस शहर में इस त्योंहार के प्रति लोगों के जुड़ाव को देखकर मैं दंग रह गया हूं। इतने साल से इतने तादाद में लोग इतनी सारी पतंगें उड़ाते हैं। अच्छा भी लगा, हमने यहां के पतंग वाले मोहल्ले में पतंग खरीदने के भी सीन शूट किए। जयपुर के सड़क से गुजरे तो लगा कि बड़ा पॉजिटिव शहर है और वेलकिंग लोग है। इस साल हम यहां आ पाए है, यह भी बहुत अच्छी चीज हुई है।


