लोकायुक्त पुलिस भोपाल ने कलेक्टर दफ्तर नर्मदापुरम के जनजातीय कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप किया है। रिश्वत की मांग अंतरजातीय विवाह पर मिलने वाली शासकीय प्रोत्साहन राशि के भुगतान के एवज में की जा रही थी। खास बात यह है कि आरोपी बाबू ने अपने दफ्तर में ही युवक को बुलाया था। उसे कोई शक न हो इसलिए लोकायुक्त पुलिस की इंस्पेक्टर उस युवक की पत्नी बनकर बाबू के दफ्तर में पहुंची थीं। जैसे ही बाबू ने रिश्वत की रकम ली, उन्होंने फौरन उसे ट्रैप कर लिया। बैक डेट में फाइल तैयार कर भुगतान कराने पहले 20 हजार, काम होने के बाद 70 हजार मांगे एसपी लोकायुक्त दुर्गेश राठौर के मुताबिक इस संबंध में सिवनी मालवा निवासी 36 वर्षीय प्रवीण सोलंकी ने शिकायत दर्ज करवाई थी। बताया था कि उन्होंने अंतरजातीय विवाह किया है। इसके तहत शासन से 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलनी थी। इस राशि के भुगतान के लिए उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ बाबू मनोज सोनी से बात की थी। मनोज ने बैक डेट में फाइल तैयार कर भुगतान कराने के नाम पर पहले 20 हजार रुपए और काम होने के बाद 70 हजार रुपए की मांग बतौर रिश्वत की थी। शिकायत मिलने के बाद उसका सत्यापन करवाया गया। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप दल के कहने पर प्रवीण 16 दिसंबर की दोपहर मनोज के पास पहुंचे। जैसे ही आरोपी बाबू ने उन के हाथ से पहली किश्त के तौर पर रिश्वत की रकम ली, वहां पहले से मौजूद टीम ने उसे दबोच लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसलिए गंभीर है यह मामला
अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाने वाली शासकीय सहायता का उद्देश्य सामाजिक समरसता बढ़ाना है। ऐसे मामलों में रिश्वत की शिकायत सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब इस मामले में टीम यह भी पता लगा रही है कि रिश्वत की इस रकम में बाबू के अलावा भी कोई हिस्सेदार था या नहीं? बंद मिले दफ्तर के सीसीटीवी कैमरे
बाबू के दफ्तर में दो सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, लेकिन दोनों ही लंबे समय से बंद हैं। अब लोकायुक्त पुलिस पत्र लिखकर इसके कारण की जानकारी मांग रही है। इसमें पूछा जाएगा कि आखिर सरकारी दफ्तर के यह कैमरे कब से और क्यों बंद थे?


