लुधियाना| गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने घोड़ों की देखभाल को लेकर पंजाब के घोड़ा प्रजनकों की बैठक कराई। इसमें करीब 60 प्रजनकों ने हिस्सा लिया। बैठक में घोड़ों के स्वास्थ्य, आहार और बीमारियों से बचाव पर चर्चा हुई। डॉ. परमिंदर सिंह, अतिरिक्त निदेशक प्रसार शिक्षा ने कहा कि घोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए समय पर इलाज और अच्छा पोषण जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य में बेहतर नस्ल के घोड़े तैयार करने के लिए संसाधन, ढांचा और अनुसंधान सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने प्रजनकों को शुद्ध नस्ल के घोड़े पालने और बेचने के लिए प्रेरित किया। कहा कि विश्वविद्यालय हर संभव मदद देगा। डॉ. अरुण आनंद, विभागाध्यक्ष वेटरनरी सर्जरी ने बताया कि शूल रोग घोड़ों में बेहद दर्दनाक और खतरनाक होता है। इससे बचाव के लिए पहले से सावधानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर यह बीमारी हो जाए तो तुरंत इलाज कराना चाहिए। उन्होंने यूनिवर्सिटी में उपलब्ध इलाज की सुविधाओं की जानकारी दी। डॉ. अमित शर्मा ने घोड़ों के आहार प्रबंधन पर बात की। उन्होंने बताया कि बछड़ों के लिए संतुलित और पौष्टिक खुराक कैसे तैयार की जाए। बैठक में कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक और पशु चिकित्सक भी मौजूद रहे। प्रजनकों ने विशेषज्ञों से आहार और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे। उन्हें टीकाकरण कार्ड और यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित साहित्य भी दिया गया, ताकि वे रिकॉर्ड रख सकें और जानकारी बढ़ा सकें।


