चंडीगढ़ की मॉडल जेल बुड़ैल में स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार कैदियों के लिए टीबी स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है। अब तक 1200 में से 697 कैदियों की जांच हो चुकी है, जिनमें 480 एक्स-रे और 139 थूक सैंपल शामिल हैं। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह के अनुसार जेल का बंद माहौल संक्रमण के लिए ज्यादा संवेदनशील होता है, इसलिए इस बार एचआईवी, एसटीडी और सिफलिस की जांच के साथ टीबी स्क्रीनिंग भी जोड़ी गई है। यह पहल कैदियों की सेहत और संक्रमण की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक घंटे में रिपोर्ट देने वाली मशीन
इस जांच के लिए जेल में 3 पोर्टेबल एआई आधारित एक्स-रे मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें सिर्फ एक घंटे में रिपोर्ट तैयार कर देती हैं। जिन कैदियों में बीमारी के लक्षण सामने आ रहे हैं, उनका तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया है ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी जितनी जल्दी पकड़ में आए, उतना ही इलाज आसान और सफल होता है। टीबी के लक्षण पहचानना जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि अगर खांसी 2 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहे, कफ या खून आए, सीने में दर्द, थकान, कमजोरी, वजन कम होना, भूख कम लगना, बुखार या रात में पसीना आने जैसी परेशानी हो तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। समय पर जांच और इलाज से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।


