चंडीगढ़ पुलिस पर हमला करने वाले फाइल में दबे:3 साल से 30 प्रदर्शनकारी फरार, बेवसाइट पर सिर्फ वांटेड लिस्ट

चंडीगढ़ पुलिस भले ही बड़े-बड़े मामलों को सुलझाने का दावा करती हो, लेकिन अपने ही एक इंस्पेक्टर और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले प्रदर्शनकारियों को 3 साल बाद भी ढूंढ नहीं पाई है। हैरानी की बात यह है कि इन सभी आरोपियों की तस्वीरें पुलिस की वेबसाइट पर सार्वजनिक तौर पर जारी की गई हैं, फिर भी एक भी वांटेड आरोपी अब तक गिरफ्त में नहीं आ सका। मामला पुलिस स्टेशन 3 में दर्ज एफआईआर नंबर 63 जो 8 फरवरी 2023 को दर्ज की गई थी। एफआईआर के मुताबिक, सेक्टर-52 और दरिया गांव की डिवाइडिंग रोड पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ में घुसने की कोशिश की थी। पुलिस ने जब बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकना चाहा, तो प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और पुलिस पर हमला कर दिया। इंस्पेक्टर के सिर में लगी चोट हमले में पुलिस स्टेशन 11 के थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जयवीर राणा के सिर में चोट आई थी, जबकि अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। घटना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने 30 आरोपियों को वांटेड घोषित किया और उनकी तस्वीरें अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कीं। साथ ही यह भी लिखा गया कि इन आरोपियों के बारे में सूचना देने वाले को 10 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा। पुलिस द्वारा जारी की गई वांटेड लिस्ट में जिन नामों का जिक्र है, उनमें हरदीप सिंह बराड़, हरमनदीप सिंह उर्फ तूफान, सतवंत सिंह संधू (लुधियाना), उदयवीर सिंह उर्फ मस्ताना उर्फ संदीप सिंह (अमृतसर), जसवीर सिंह उर्फ जबर जंग (पटियाला), सतनाम और भगवत सिंह उर्फ प्रधानमंत्री बजे शामिल हैं। इसके अलावा कुल मिलाकर 30 प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें पुलिस ने सार्वजनिक की हुई हैं। अफसर खुद पंजाब से फिर भी ढूंढना मुशिक्ल सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब चंडीगढ़ पुलिस की एसएसपी खुद पंजाब से ताल्लुक रखते हैं, इसके बावजूद पंजाब के अलग-अलग जिलों से जुड़े इन आरोपियों का अब तक कोई सुराग क्यों नहीं लग पाया। तीन साल बीत जाने के बाद भी एक भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शनकारियों ने लगा रखे तंबू गौरतलब है कि मोहाली और चंडीगढ़ की सीमा पर वाई पीएस चौक के पास लंबे समय से निहंग संगठन (निहंग जत्थेबंदी) की ओर से धरना दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने वहीं अपने तंबू भी लगा रखे हैं। यह धरना तिहाड़ जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआणा को रिहा करने की मांग को लेकर दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राजोआणा अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा। अब सवाल यह है कि जिस मामले में पुलिस के अफसर और जवान घायल हुए, उसी केस के आरोपी 3 साल से खुलेआम फरार हैं और पुलिस की वांटेड लिस्ट में नाम होने के बावजूद कानून की पकड़ से बाहर हैं।

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