चंडीगढ़ पुलिस पहचान और रिकवरी साबित नहीं कर सकी:कोर्ट ने किया नाबालिग आरोपी बरी, सेक्टर-49 में की थी स्नैचिंग,समय पूछने के बहाने वारदात

चंडीगढ़ सेक्टर-49 इलाके में स्नैचिंग और चाकू मारने के मामले में चंडीगढ़ की जिला अदालत ने नाबालिग आरोपी को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार की अदालत ने कहा कि केस में पेश किए गए सबूतों से आरोपी की पहचान और उसकी भूमिका साफ तौर पर साबित नहीं हो पाई। इसी वजह से अदालत ने संदेह का फायदा देते हुए नाबालिग आरोपी को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश दिया। समय पूछने के बहाने वारदात मामल 11 मई 2023 से जुड़ा है, जो थाना सेक्टर-49 में भारतीय दंड संहिता की धारा 392, 397, 34 और 411 के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता हंसराज ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह 10 मई 2023 की शाम हिमाचल प्रदेश के नूरपुर (कांगड़ा) से बस में चंडीगढ़ आया था। रात करीब 1 बजे वह सेक्टर-43 बस स्टैंड पर उतरा और वहां से पैदल अपने घर सेक्टर-46 की ओर जाने लगा। जब वह सेक्टर-50 और सेक्टर-45 की डिवाइडिंग रोड के पास पहुंचा, तभी पीछे से एक युवक उसके पास आया और उससे समय पूछा। शिकायत के मुताबिक जैसे ही उसने जेब से मोबाइल निकाला, युवक ने मोबाइल छीन लिया। उसी दौरान वहां दो अन्य युवक और एक लड़की भी आ गए। आरोप है कि सभी ने मिलकर उसे पकड़ लिया और उसकी जेब से करीब 3000 रुपये नकद, आधार कार्ड, अन्य पहचान पत्र और मोबाइल फोन छीन लिया। जब उसने विरोध किया तो एक आरोपी ने उस पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद वह किसी तरह मदद लेकर GMCH-32 अस्पताल पहुंचा, जहां उसका इलाज कराया गया। इलाज के दौरान दिए गए उसके बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। जानिए पुलिस ने कोर्ट में क्या कहा शिकायत मिलने के बाद थाना सेक्टर-49 पुलिस ने 11 मई 2023 को FIR नंबर 37 दर्ज की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घायल के मेडिकल रिकॉर्ड को केस में शामिल किया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू करते हुए आसपास के इलाकों से जानकारी जुटाने की कोशिश की। जांच के दौरान पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल था। पुलिस का कहना था कि पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर कुछ बरामदगी भी हुई है। इसके अलावा चाकू को भी एक सह-आरोपी के बयान के आधार पर बरामद दिखाया गया। पुलिस ने मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाकर चालान तैयार किया और केस को अदालत में पेश कर दिया। जांच के दौरान पुलिस ने गवाहों के बयान दर्ज किए और दावा किया कि आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका साबित होती है। कोर्ट में पुलिस कार्रवाई पर सवाल हालांकि, कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि शिकायतकर्ता ने आरोपियों की पहचान को लेकर स्पष्ट बयान नहीं दिया। इसके अलावा नाबालिग आरोपी से कोई सीधी बरामदगी भी नहीं दिखाई गई। पुलिस द्वारा कराई गई पहचान प्रक्रिया और सबूतों की कड़ी पर भी अदालत ने सवाल उठाए।

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