चंडीगढ़ में कोर्ट ने 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किए गए युवक को बरी कर दिया है। कोर्ट ने गवाहों के बयानों, पीड़िता के बयान पलटने और सीएफएसएल रिपोर्ट में भ्रूण से डीएनए प्रोफाइल नहीं मिलने के आधार पर लिया। सुनवाई के दौरान जब पीड़ित लड़की को कोर्ट में पेश किया गया तो उसने साफ कहा कि वह आरोपी अनिल कुमार को नहीं जानती और न ही कभी उसे देखा है। उसने स्वीकार किया कि डॉक्टर और काउंसलर के सामने उसने खुद ही झूठी कहानी बनाकर रायपुर खुर्द निवासी अनिल कुमार का नाम लिया था। सीएफएसएल की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि लड़की के गर्भ से निकाले गए भ्रूण से किसी भी डीएनए प्रोफाइल की पुष्टि नहीं हो सकी। इससे यह सिद्ध नहीं हो सका कि भ्रूण का पिता कौन है। यह रिपोर्ट अभियोजन पक्ष की दलीलों को कमजोर करती रही। जाने क्या था पूरा मामला… 30 दिसंबर 2022 को मौलीजागरां थाना पुलिस को सेक्टर-16 अस्पताल से सूचना मिली थी कि एक 17 वर्षीय नाबालिग गर्भवती हालत में भर्ती हुई है। अस्पताल में डब्ल्यू.सी.एच.एल. की काउंसलर की मौजूदगी में पीड़िता ने बताया था कि वह अनिल नामक युवक के साथ रिलेशनशिप में थी, जो उसके भाई का दोस्त है। उसने कहा था कि वे दोनों शादी करना चाहते थे और सहमति से दो बार शारीरिक संबंध बनाए थे। गर्भधारण की पुष्टि के बाद वह गर्भपात कराना चाहती थी। उसने काउंसलर से यह भी कहा था कि वह अनिल के खिलाफ कोई शिकायत नहीं देना चाहती, क्योंकि वह उससे विवाह करना चाहती है। ऐसे दर्ज हुआ केस डब्ल्यू.सी.एच.एल. की रिपोर्ट के आधार पर मौलीजागरां पुलिस ने एक जनवरी 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) के तहत केस दर्ज कर अनिल कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने पीड़िता के 164 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान भी दर्ज कराए थे।


