पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ की अजंता कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी घोटाला मामले में कोऑपरेटिव सोसाइटी रजिस्ट्रार अखिल कुमार ने सोसाइटी की गवर्निंग काउंसिल को भंग कर दिया और विभाग के इंस्पेक्टर जगदीश चंदर को प्रशासक नियुक्त किया है। रजिस्ट्रार ने प्रशासक को दो दिनों के भीतर सोसाइटी का सारा रिकॉर्ड कब्जे में लेने के निर्देश दिए गए हैं। रजिस्ट्रार ने कहा कि खातों में भारी गड़बड़ी पाई गई है, जिसे सोसाइटी के सदस्यों को नहीं सौंपा जा सकता। कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए डीएसपी साउथ और चार अन्य इंस्पेक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने आरोपियों को बचाने की कोशिश की और शिकायतकर्ता को ही उलझाने का प्रयास किया। कोर्ट ने आदेश दिया कि एफआईआर में धारा 467, 468 और 471 को जोड़ा जाए। बिना फायर उपकरण एनओसी जारी करने का खुलासा हाईकोर्ट ने पाया कि कार्यकारिणी ने सोसाइटी के सदस्यों की सुरक्षा को खतरे में डालते हुए बिना फायर सेफ्टी उपकरण लगाए एनओसी हासिल की। जांच में यह भी सामने आया कि कार्यकारिणी ने निजी लाभ के लिए बाहरी लोगों को सदस्य बनाकर 18-24% ब्याज दर पर धन वसूला, जिसका हिसाब खातों में नहीं मिला। बिल्डर को ढ़ाई करोड़ का अतिरिक्त भुगतान जांच में पता चला कि कार्यकारिणी ने बिल्डर सुरिंदर बिल्डर्स को एग्रीमेंट समझौते से अधिक 2.52 करोड़ रुपए का भुगतान किया। यह राशि सोसाइटी के ट्रायल बैलेंस और बैलेंस शीट में दर्ज नहीं की गई। 7 करोड़ से अधिक का गबन सरकारी रिकॉर्ड के तुलनात्मक विश्लेषण में पाया गया कि भूमि लागत में 52 लाख और निर्माण लागत में 6.78 करोड़ का गबन हुआ है। यह धनराशि न तो सोसाइटी के बैंक खातों में और न ही एफडीआर में दर्ज मिली। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की कोर्ट ने कहा कि आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं किया और मामले को भटकाने की कोशिश की। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उनकी संपत्तियों और लेनदेन की गहन जांच के आदेश दिए।


