चंडीगढ़ को स्लम फ्री बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। क्लब की झुग्गी बस्ती हटाने के बाद अब प्रशासन का अगला लक्ष्य धनास की कच्ची कॉलोनी को हटाना है। संपदा विभाग लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में 800 से ज्यादा झुग्गियों पर बुलडोजर कार्रवाई करने वाला है। यहां किसानों की निजी जमीन पर अस्थायी रूप से झुग्गियां बसाई हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि यह शहर की अंतिम बची बड़ी कच्ची कॉलोनी है, जिसपर अब सर्दियों के बाद कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों में कार्रवाई करने पर कोर्ट का स्टे मिलने की संभावना रहती है। पढ़ें चंडीगढ़ को स्लम फ्री बनाने में अब तक क्या हुआ… 2025 की मेगा ड्राइव में 3 कॉलोनी पर कार्रवाई 2025 के अतिक्रमण के खिलाफ ड्राइव में प्रशासन ने कई प्रमुख और बड़ी अवैध कॉलोनियों को हटाया। इन क्षेत्रों को खाली कराकर भूमि को पुनर्संरचना और विकास योजनाओं के लिए तैयार किया गया है। इनमें शामिल हैं: धनास की आखिरी कच्ची कॉलोनी अब निशाने पर सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब धनास की अंतिम बची कच्ची कॉलोनी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है और जल्द ही जमीन को कब्जा-मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इस कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ लगभग पूरी तरह से अनधिकृत बस्तियों से मुक्त हो जाएगा। पूरे साल चला अतिक्रमण हटाने का अभियान इस वर्ष प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कई स्लम कॉलोनियों और वर्षों पुराने अतिक्रमणों को हटाया है। अधिकारियों ने इसे अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। शहर में दोबारा कब्जे न हों, इसके लिए फील्ड अफसरों की विशेष टीमें बनाई गई है और उनकी जवाबदेही भी तय की गई है। 30 सितंबर को प्रशासन ने सेक्टर 38 की शाहपुर कॉलोनी में तोड़फोड़ की थी। यह कालोनी 4.5 एकड़ सरकारी जमीन पर फैली हुई थी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 250 करोड़ रुपए है। मांग रहे लैंड पुलिंग पॉलिसी धनास की जिस 10 एकड़ जमीन पर यह कच्ची कॉलोनी बनी है, वह निजी मालिकाना है। किसान अपनी जमीन प्रशासन को देने को तैयार हैं, लेकिन वे लैंड पुलिंग पॉलिसी लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह जमीन खेती योग्य नहीं है, इसलिए उन्होंने सिर्फ किराए पर अस्थायी शेड बनवाकर लोगों को रहने दिया हुआ है।


