विपिन कुमार सिंह | चतरा ग्रामीण परिवेश बहुल चतरा जिले में कुपोषण एक बड़ी समस्या बन गई है। चतरा में औसतन प्रत्येक माह एक दर्जन बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहें हैं। यह आंकड़ा उन कुपोषित बच्चों का जो कुपोषण के उपचार के लिए एमटीसी में पहुंच पा रहे हैं। जबकि कई ऐसे भी कुपोषित बच्चे हैं जो जागरुकता व जानकारी के अभाव में इलाज के लिए कुपोषण उपचार केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं। 12 प्रखंड वाले चतरा जिले में कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए मात्र चार एमटीसी स्थापित किया गया है। जिसका संचालन स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जा रहा है। चतरा सदर अस्पताल परिसर में 15 बेड का एमटीसी संचालित है। जहां वर्तमान समय में 8 कुपोषित बच्चे भर्ती हैं। इसके अलावा रेफरल अस्पताल सिमरिया में 10 बेड, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हंटरगंज में 5 बेड तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टंडवा में 10 बेड का एमटीसी संचालित है। सिविल सर्जन डॉ दिनेश कुमार ने कहा कि कुपोषण से बचने के लिए जागरुकता जरुरी है। गर्भवती महिलाओं के खान पान में सुधार कर कुपोषित बच्चों के जन्म को रोका जा सकता है। गर्भधारण के तीसरे माह से लेकर नौवें माह तक विशेष सतर्कता की जरूरत होती है। इस दौरान गर्भवती माताओं के लिए हरी सब्जी, फल, दूध, अंडा जैसे पौष्टिक आहार आवश्यक होता है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा गर्भवती माताओं को डिलीवरी के पूर्व तक 180 व डिलिवरी के बाद 180 आयरण व कैलशियम की खुराक निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ताकि होने वाले बच्चे को कुपोषण से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि जिले के दो और प्रखंडों में 10-10 बेड का कुपोषण उपचार केंद्र खोलने का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है।


