पंजाब कांग्रेस में चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग दोनों गुट हाईकमान के सामने खुद को पावरफुल दिखाने में जुटे हैं। चन्नी गुट इस बात पर अड़ा है कि राजा वड़िंग की अगुवाई में विधानसभा चुनाव नहीं जीता जा सकता, इसलिए उन्हें प्रधान पद से हटाया जाए। उधर, राजा वड़िंग जिला प्रधानों और कार्यकर्ताओं का समर्थन होने का दावा करके खुद को मजबूत साबित करने में लगे हैं। दिल्ली में हाईकमान के साथ हुई बैठकों में भी इस मुद्दे पर काफी तल्खी हो चुकी है। इसी खींचतान के बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल आज से नौ दिन के दौरे पर पंजाब में रहेंगे। वे बूथ लेवल से फीडबैक लेकर ग्राउंड रिएलिटी जानेंगे कि कार्यकर्ताओं और जनता के बीच चन्नी या वड़िंग में से कौन ज्यादा मजबूत है, और अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे। ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ मुहिम की रूपरेखा— इस दौरे में भूपेश बघेल के सामने दो बड़ी चुनौतियां पिछला दौरे पर भूपेश बघेल की दो बड़ी असफलताएं 1. गुटबाजी खत्म करने में रहे नाकाम: भूपेश बघेल के पिछले दौरे का मुख्य उद्देश्य राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी खेमे के बीच के विवाद को सुलझाना था। हालांकि, चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा समर्थकों ने शुरुआती बैठकों का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया और अलग से बैठकें कर अपनी नाराजगी जताई। नतीजतन, दौरे के अंत तक भी दोनों गुटों के बीच मतभेद जस के तस बने रहे। 2. चन्नी खेमे की प्रमुख मांग पर नहीं बन सकी सहमति: असंतोष जता रहे नेताओं की सबसे प्रमुख मांग यह थी कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से राजा वड़िंग को हटाया जाए। बघेल ने साफ कर दिया कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का अधिकार उनके पास नहीं है और वे केवल नेताओं की बात हाईकमान तक पहुंचा सकते हैं। इसका परिणाम यह रहा कि चन्नी गुट अपनी मांग पर अड़ा रहा और कोई राजनीतिक समझौता नहीं हो पाया। रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस की गुटबाजी पर क्या कहा, जानिए..


