चांदी का उतार-चढ़ाव: निवेशकों के लिए बनी चुनौती, सर्राफा बाजार में 2.89 लाख के पार

बीकानेर सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी ने फिर से तेज उतार-चढ़ाव का प्रदर्शन किया। दिनभर के ट्रेडिंग सत्र में चांदी की कीमत अधिकतम 2,89,393 रुपए प्रति किलो तक पहुंची, जबकि न्यूनतम 2,74,124 रुपए के स्तर तक आ गई। शाम तक बाजार में चांदी 2,77,690 रुपए के आसपास स्थिर रही। आरटीजीएस ट्रेडिंग में भी चांदी ने 2,89,393 रुपए के उच्च स्तर को छुआ, वहीं मंदी में इसकी कीमत 2,80,649 रुपए तक गिर गई। पिछले सप्ताह की तुलना में चांदी की कीमतों में स्पष्ट उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 10 जनवरी को चांदी का अधिकतम भाव 2,82,500 रुपए प्रति किलो था और न्यूनतम 2,76,000 रुपए के आसपास रहा। वहीं 12 जनवरी को यह 2,85,000 रुपए के स्तर तक पहुंची थी। बुधवार को 2,89,393 रुपए तक बढ़ने से निवेशकों में उत्साह देखा गया, लेकिन दिन के दौरान 2,74,124 रुपए तक गिरने से सावधानी भी बनी रही। सर्राफा बाजार एक्सपर्ट एवं चांदी विशेषज्ञ मुकेश जांगिड़ के अनुसार, चांदी के दाम अभी भी वैश्विक बाजार के संकेतों, विदेशी मुद्रा दर और सरकारी बॉन्ड के रिटर्न पर निर्भर हैं। मौजूदा रुझान को देखते हुए निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित न होकर दीर्घकालिक निवेश की योजना बनानी चाहिए। खरीदारी करने से पहले भाव स्थिर होने का इंतजार करना फायदेमंद रहेगा। चांदी की बढ़ती कीमत ने रोकी ग्राहकी, कारीगर हुए परेशान : सर्राफा बाजार में चांदी के तेजी से बढ़ते दामों ने अब आम ग्राहकों और कारीगरों की परेशानी बढ़ा दी है। 289,393 रुपए प्रति किलो तक पहुंची चांदी के कारण ग्राहकी लगभग ठहर सी गई है। ग्राहकों ने अब आभूषण या छोटे निवेश पर हाथ झटकना शुरू कर दिया है। कारीगरों के घरों की दुकानों में मानो सन्नाटा सा छा गया है। जिन परंपरागत कारीगरों की रोजी-रोटी चांदी पर निर्भर करती है, उन्हें अब ग्राहकों की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छोटे-मध्यम कारीगर इस महंगाई के दौर में उत्पादन कम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चांदी के दाम स्थिर नहीं हुए तो आगामी महीने में यह समस्या और गहरी हो सकती है। ग्राहकों और कारीगरों दोनों के लिए राहत के उपाय जल्द लाए जाने की आवश्यकता है। चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए रणनीति जरूरी चांदी का बाजार हमेशा वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों से प्रभावित रहता है। डॉलर इंडेक्स, अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमत, सोने-चांदी का अंतर और आयात-निर्यात नीतियां इसकी कीमतों को दिशा देती हैं। उदाहरण के लिए, इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और घरेलू मांग में हल्की कमी ने चांदी के भाव में हल्की गिरावट लाने का काम किया। वहीं आरटीजीएस ट्रेडिंग के दौरान बड़े व्यापारी और निवेशक तेजी से खरीद-बिक्री करते रहे, जिससे दिनभर उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक्सपर्ट के अनुसार छोटे निवेशक 2,75,000 से 2,80,000 प्रति किलो के स्तर पर सतर्क रहते हुए अल्पकालिक अवसरों पर खरीद-बिक्री कर सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक निवेश के लिए 2,85,000 के आसपास स्थिर भाव देखना बेहतर रहेगा। इस प्रकार बुधवार का दिन सर्राफा बाजार में चांदी के लिए मिश्रित रहा, जिसमें निवेशकों और व्यापारियों को तेजी और मंदी दोनों के संकेत मिले। आगामी हफ्तों में वैश्विक बाजार और घरेलू मांग के रुझानों पर नजर रखकर ही निर्णय लेना उचित होगा।

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