चांदी के दाम बढ़ने से कारखाने बंद:सराफा व्यापारी बेच रहे पूजन सामग्री, कारीगर लगाने लगे चाट के ठेले, चला रहे ऑटो

चांदी के दाम चार लाख रुपए प्रति किलो होने के बाद शहर के सराफा बाजार में वीरानी छा गई है। चांदी के आभूषण निर्माण और नक्काशी के ज्यादातर पुराने कारखाने बंद हो गए हैं, कुछ बंद होने की कगार पर हैं। सोना-चांदी के कारोबारी दूसरे धंधे तलाशने लगे हैं। अपने पुश्तैनी काम के साथ दूसरे धंधे भी कर रहे हैं। कोई प्रॉपर्टी के काम में लग गया है तो किसी ने पूजन सामग्री बेचने के साथ अन्य काम शुरू कर दिए हैं। चांदी के कारीगरों पर सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। कारखाने बंद होने के बाद कोई चाट का ठेला लगा रहा है तो कोई ऑटो-रिक्शा चला रहा है। चांदी के पुराने कारोबारी रवि सोनी बताते हैं कि चांदी के आभूषण निर्माण में सागर प्रदेश की बड़ी मंडी माना जाता है। उनका सागर में 100 साल से भी ज्यादा पुराना कारखाना है। जब चांदी 1 लाख पर पहुंची तो काम मिलना बंद हो गया। ऑर्डर आना बंद हो गए। पिछले कुछ सालों से मैन्युफैक्चरिंग बंद है। सागर में निर्मित होने वाले डिनर सेट, मूर्ति, सिंहासन व अन्य आइटम की मांग विदेशों में भी है। सागर से इंदौर के अलावा उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र सबसे ज्यादा आइटम भेजे जाते हैं। कभी सागर में 500 स्थानों पर चांदी का काम होता था, अब गिने-चुने कारखाने बचे हैं। सालों पहले चांदी के तोड़र का चलन बंद हो गया था, लेकिन चांदी की करधनी, पायल, बिछिया, देहाती चूड़ियां अभी भी चलन में हैं। चांदी के कारोबारी दिलीप कचर ने बताया कि कारीगर छुट्टी पर हैं। चांदी के कारीगर संजू नामदेव 30 हजार रुपए महीने तक कमाते थे, लेकिन बेरोजगार होने के बाद अब चकराघाट पर चाट का ठेला लगा रहे हैं। ज्वैलर्स महेंद्र सोनी ने जनरल स्टोर खोल लिया है, वहीं सराफा कारोबारी रामेश्वर सोनी ने ज्वैलर्स के बाजू में ही पूजन सामग्री की दुकान चालू कर दी है। सोने-चांदी के पुराने जेवर चमकाकर शादी का चढ़ावा चांदी के दाम 4 लाख रुपए किलो पहुंचने के बाद शादी-ब्याह का मुहूर्त निकलवा चुके परिवार पशोपेश में हैं। एक साल पहले जितने दाम में पायल बन जाती थी अब उतने रेट में बिछिया बन रही है। चांदी की बिछिया को सुहाग का प्रतीक माना गया है। लोग वधु को इसे उपहार में देते हैं। नवंबर 2024 में चांदी 1 लाख रुपए किलो थी, जो 14 महीने में ही 4 लाख पार हो गई। वहीं इस अवधि में 24 कैरेट सोना 82 हजार रुपए तोला (10 ग्राम) था, जो बढ़कर 1 लाख 84 हजार रुपए तक पहुंच गया है। सराफा व्यापारी पंकज जैन बताते हैं कि सोने-चांदी के दाम बढ़ने के बाद लोग शादी-ब्याह के लिए पुराने जेवर पॉलिश कराकर इस्तेमाल कर रहे हैं। चांदी की पायल के रेट पर अब बिछिया बिक रही है। करधनी बनवाने में लोगों को सोचना पड़ रहा है। कोरोनाकाल में गिरवी रखे जेवर उठाने आ रहे लोग, विवाद भी कोरोनाकाल में लोगों ने सोने-चांदी के जेवर गिरवी रखकर परिवार और धंधा चलाया। कई लोग ब्याज बढ़ने से जेवर उठाने ही नहीं पहुंचे, लेकिन चांदी के रेट 4 गुना और सोना 2 गुना से ज्यादा होने के बाद लोग 5 साल पुरानी पर्चियां लेकर जेवर उठाने सुनार के पास जा रहे हैं। सराफा में लाइसेंसी कम ही हैं, लेकिन कच्ची पर्ची पर एक व्यवहारिक लेनदेन चलता है। ब्याज चुकाकर गहने उठाने में फायदा देख लोग सुनारों के पास सालों पहले गिरवी रखे जेवर उठाने के लिए पहुंच रहे हैं। जिला सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद जड़िया ने बताया कि सोने-चांदी के रेट बढ़ने के बाद सराफा व्यापारियों के सामने विकट परिस्थिति बन गई। 10-12 साल पहले गिरवी रखे जेवर उठाने के लिए लोग आ रहे हैं, जिससे विवाद की स्थिति बन रही है। जेवर न देने पर लोग थाने में रिपोर्ट लिखाने की धमकी दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने आ रहे मिक्स (मिलावटी) चांदी के आभूषण शादी का सीजन आते ही चांदी की बिछिया, पायल, करधनी, अंगूठी व अन्य गहनों की डिमांड बढ़ जाती है। चांदी के कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने बताया कि यूपी से लाए जाने वाले चांदी के गुरिए व अन्य कच्चे माल में कैडमियम व तांबा की मिलावट की जाती है। ये दोनों धातु चांदी के साथ आसानी से मिक्स हो जाते हैं। इससे चांदी और चमकदार बन जाती है। इसे मिक्स चांदी कहते हैं। कुछ साल पहले सागर की पुलिस ने यूपी से आई ऐसी ही मिलावटी चांदी के गुरिया जब्त किए थे। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि फाइन चांदी के रेट बढ़ने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मिलावटी चांदी के आभूषण बिकने आ रहे हैं। आगरा, मथुरा, हाथरस से सप्लाई होने वाले कच्चे माल में चांदी की मात्रा 30-40 प्रतिशत तक रहती है।

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