मकर संक्रांति पर चाइनीज मांझे का खौफ पूरे शहर में दिखा। सुबह से हादसे शुरू हुए, जो शाम तक जारी रहे। हर गली और सड़क पर लोग सतर्क नजर आए। पुरुषों ने गले में मफलर और गमछा लपेटा। महिलाएं चुनरी और दुपट्टे से चेहरा और गर्दन ढंककर निकलीं। दोपहिया वाहन चालकों ने बाइक के आगे लोहे की तार तक बंधवाई। कई लोग बच्चों को बाइक पर बैठाने से बचते दिखे। वाहन धीमी रफ्तार से चले। इसके बावजूद 10 लोग घायल हो गए।
सुबह 11 बजे आगर नाके के पास रतलाम निवासी अंतर बंजारा (28) बाइक से जा रहे थे। अचानक गले में मांझा उलझ गया। गला गहराई तक कट गया। खून बहने लगा। राहगीरों ने तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने गले में आठ टांके लगाए। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज नहीं होता तो जान को खतरा हो सकता था। कुछ देर बाद फाजलपुरा मंडी में सब्जी लेने गई सीमा पति भीमराज (45) मांझे की चपेट में आ गईं। मांझा दोनों पैरों से होकर गुजरा। दोनों पैरों में गहरे घाव हो गए। दर्द से तड़पती महिला को साथ आई महिलाओं ने जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने मांझा निकाला। दाएं-बाएं पैर में कुल सात टांके लगाए। महिला को कुछ समय अस्पताल में भर्ती रखा गया। अस्पताल में पूरे दिन केस आते रहे
जिला अस्पताल में दोपहर 11 से 2 बजे के बीच तीन केस दर्ज हुए। इनमें पतंग उड़ाते समय आकाश मालवीय का अंगूठा कट गया। खून नहीं रुकने पर डॉक्टरों को तुरंत प्राथमिक उपचार करना पड़ा। दोपहर 2 से शाम 6 बजे के बीच सबसे ज्यादा छह केस सामने आए। गला, हाथ, चेहरा और ठोड़ी पर कट के कुल 9 मामले केवल जिला अस्पताल में दर्ज हुए। इसके अलावा कई घायल निजी अस्पतालों में भी पहुंचे। गला कटा, बाइक रोकी तो टला हादसा दानीगेट निवासी 38 वर्षीय धर्मेंद्र निरभाण भी शिकार हुए। बाइक से ससुराल नागझिरी जाते समय डी-मार्ट और लालगेट के बीच धर्मेंद्र के गले में चायनीज मांझा उलझने गला कट गया। शुक्र है बाइक की स्पीड कम थी और मांझा गले में उलझते ही उन्होंने हाथ से पकड़कर उसे खींचने का प्रयास किया और बाइक रोक दी। धर्मेंद्र ने बताया यदि बाइक की स्पीड थोड़ी तेज होती तो बड़ी घटना हो जाती। शाम 5.20 बजे महावीर कॉलोनी मक्सी रोड के सामने मांझा दो बाइकों में उलझ गया। दोनों आपस में टकराने से घायल हो गए।


