छत्तीसगढ़ में हुए 2161 करोड़ के शराब घोटाले में जांच एजेंसी ईडी और ईओडब्ल्यू की आरोपियों की सूची में शराब निर्माता तीन कंपनियां भी शामिल हैं। इनमें भाटिया वाइन एंड मर्चेंटस, वेलकम डिस्टलरी और छत्तीसगढ़ डिस्टलरी का नाम शामिल है। तीनों डिस्टलरी के मालिक और उनसे जुड़े लोग शराब सिंडीकेट में शामिल थे। सरकारी दुकानों में शराब की प्रति पेटी सप्लाई पर उन्हें 100 रुपए कमीशन मिलता था। जबकि डुप्लीकेट होलोग्राम शराब की सप्लाई से 600 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से कमीशन मिलता था। सरकार से जो ऑर्डर मिला है, उससे ज्यादा शराब बनाकर अवैध रूप से बेची गई है। इससे डिस्टलरी मालिकों को 300 करोड़ से ज्यादा का कमीशन मिला। जांच एजेंसी ने यह दावा शराब घोटाले में पेश चौथी चार्जशीट में किया है। एजेंसी का दावा है कि राज्य में किस कंपनी की शराब बिकेगी और किसकी नहीं, ये तय करने का काम भी सिंडीकेट के पास था। ऐसे में जो जितना कमीशन देता था। उसकी शराब की सप्लाई ज्यादा होती थी। जिसने कमीशन कम दिया। उसकी शराब की सप्लाई रोक दी गई। इसलिए पिछली सरकार में ब्रांडेड शराब की किल्लत थी क्योंकि सिंडीकेट को मनचाहा कमीशन ब्रांडेड शराब कंपनियों से नहीं मिल पा रहा था। चार्जशीट के मुताबिक छत्तीसगढ़ डिस्टलरी के मालिक नवीन केडिया, भाटिया वाइन एंड मर्चेंट्स भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया और वेलकम डिस्टलरी राजेंद्र जायसवाल व उनके सहयोगियों की अवैध फायदा पाने में आपराधिक लिप्तता रही है। सिंडीकेट के सदस्य विशेष सचिव आबकारी अरुणपति त्रिपाठी, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर के साथ तीनों डिस्टलरी मालिकों ने यह घोटाला किया है। इसके लिए कई बार उनकी मीटिंग भी हुई है। पार्ट-बी की शराब में डिस्टलरी को हुआ ज्यादा मुनाफा जांच एजेंसी के अनुसार पार्ट-ए, पार्ट-बी और पार्ट-सी तीनों घोटाले में डिस्टलरी मालिक शामिल थे। डिस्टलरी मालिकों को पार्ट-बी के शराब में सबसे ज्यादा मुनाफा हुआ है। इसमें सरकार ने डिस्टलरी मालिकों को नंबर दो में अतिरिक्त शराब निर्माण की अनुमति दी। इन शराब की बोतल में फैक्ट्री के भीतर ही डुप्लीकेट होलोग्राम लगाए जाते थे। वहां से आबकारी अधिकारियों की निगरानी में बिक्री के लिए अवैध शराब सीधे दुकान पहुंचती थी। अवैध शराब की बिक्री के लिए हर दुकान में अलग से गल्ला रखा गया था। इसमें पहले 560 रुपए प्रति पेटी कमीशन डिस्टलरी को मिलता था। बाद में इसे बढ़ाकर 600 रुपए प्रति पेटी कर दिया गया। जबकि वैध शराब की पेटी में 75-100 रुपए कमीशन मिलता था। शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए 70 करोड़ रुपए का कमीशन
शराब बिक्री के लिए राज्य को 8 जोन में बांटा गया था। जोन के अनुसार डिस्टलरी मालिकों से सिंडीकेट और सरकार कमीशन लेती थी। 2018 के पहले शराब बिक्री में 54% भागीदारी छत्तीसगढ़ डिस्टलरी की थी। 28% वेलकम डिस्टलरी और 18% भाटिया वाइन की भागीदारी थी। कांग्रेस सरकार में शराब कारोबार को चलाने के लिए सिंडीकेट बनाया गया। तब डिस्टलरी संचालकों ने ज्यादा शराब खपाने के लिए मोटा कमीशन दिया। वेलकम डिस्टलरी की भागीदारी बढ़ाकर 58% कर दी गई। भाटिया की 28% की गई और छत्तीसगढ़ डिस्टलरी की घटाकर 14% कर दिया गया। जिनकी भागीदारी बढ़ी उन्होंने हर साल 70-70 करोड़ रुपए कमीशन दिया। 29 आबकारी अधिकारियों को बनाया गया आरोपी तीनों डिस्टलरी मालिकों के अलावा ईओडब्ल्यू ने 29 से ज्यादा आबकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इसमें 16 अधिकारी अभी नौकरी पर हैं, जबकि 11 अधिकारी रिटायर हो गए हैं। घोटाले में शामिल दो अधिकारी की बीमारी से मौत हो चुकी है। 5 जुलाई को चार्जशीट पेश किया जाएगा। इसमें तत्कालीन विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी के करीबी जनार्दन कौरव के अलावा दिनकर वासनिक, नवीन प्रताप सिंह तोमर, विकास गोस्वामी, नीतू नोतानी, इकबाल खान समेत अन्य शामिल है। झारखंड में त्रिपाठी का पूरा काम दिनकर देख रहा था। विधानसभा चुनाव में त्रिपाठी ही फंडिंग का काम देख रहे थे। उनके लिए दिनकर और नवीन प्रताप फिल्ड में काम कर रहे थे।


