सलूम्बर जिले में बामनिया तालाब को लेकर प्रशासनिक और राजस्व विवाद सामने आया है। ग्राम बामनिया, राणावतवाड़ा, वागवतवाड़ा और जोशीवाड़ा के ग्रामीणों ने मिलकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने बतया कि तालाब के संबंध में प्रशासन को भ्रामक और तथ्यहीन रिपोर्टें प्रस्तुत की जा रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार,बामनिया तालाब का निर्माण सन 1740 में तत्कालीन मेवाड़ शासन की अनुमति से किया गया था। यह तालाब पूरी तरह ग्रामीणों के निजी खर्च से बना था और तब से लगातार इससे सिंचाई होती आ रही है। राजस्व रिकॉर्ड में आज भी इसे तालाबी भूमि के रूप में दर्ज किया गया है। ग्रामीणों ने जलभराव के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2020 में प्रशासन और दोनों गांवों की सहमति से तालाब की निकासी के लिए एक वेस्ट वीयर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में तालाब का जलस्तर वेस्ट वीयर से लगभग 4 फीट नीचे है। पानी उस स्तर तक पहुंचते ही स्वतःनिकासी शुरू हो जाएगी,जिससे जलभराव की कोई समस्या नहीं होगी। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण से जुड़ी एक समस्या भी उठाई है लगभग 10 वर्ष पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण के दौरान प्रशासनिक त्रुटि हुई थी। सड़क का स्तर तालाब की भराव क्षमता से नीचे रखा गया,जिसके कारण बारिश में सड़क पर पानी भर जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि तालाब के जलस्तर के अनुरूप सड़क का स्तर पुनः निर्धारित किया जाए। बामनिया तालाब से चार गांवों की लगभग 400 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। तालाब के निर्माण के बाद से आसपास के 15 से 20 किलोमीटर क्षेत्र में कुएं और नलकूप आज भी सक्रिय हैं।यह तालाब की उपयोगिता और जल संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। ग्रामीणों ने तालाब के डूब क्षेत्र की भूमि को लेकर भी सवाल उन्होंने बताया कि तालाब निर्माण के बाद पानी में डूब गई भूमि के संबंध में 3 सितंबर 1983 को तत्कालीन एसडीओ सलूम्बर द्वारा आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद,जो भूमि आज भी पानी में डूबी हुई है, उसे राजस्व रिकॉर्ड में गैर-खातेदारी हक से दर्ज कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस भूमि को बिलानाम (सरकारी) दर्ज करने की मांग की है।


