गढ़वा| कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि मौसम की टर्फ लाइन के पश्चिम दिशा में सक्रिय रहने के कारण इस सप्ताह भी गढ़वा जिले में तेज हवा के साथ बारिश होने की संभावना है। हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। दिन का अधिकतम तापमान जहां 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है वहीं रात का 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। ऐसी स्थिति में मक्का, दलहन,तेलहन एवं सब्जि फसलों में जल निकास की व्यवस्था बनाए रखें। धान, मड़ुआ व मक्का की फसल यदि 3- 4 सप्ताह की हो गयी है तो उसमें यूरिया का छिड़काव करें। प्रति एकड़ धान एवं मक्का में 30 किलोग्राम एवं मडुआ में 22 किलोग्राम यूरिया का छिड़काव करें। यदि रोपाई तथा बुवाई के समय यूरिया नहीं डाले हैं तो इस समय 25 से 30 प्रतिशत बढ़ा कर डालें।खड़ी फसल में खरपतवार प्रबंधन हेतु रोपाई व बुआई के 20 से 25 दिन बाद धान में बिस्पाईरीबेक सोडियम 100 मिलीलीटर, मडुआ में 2,4-डी 300 से 400 ग्राम एवं मक्का में टेंबोट्रीन 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 250 से 300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। मिर्च, टमाटर, बैंगन, बोदी आदि सब्जियों में पत्ती सिकुड़न वाली बीमारी यानी कोंकड़ी लग रही है या भिंडी, मूंग, उड़द या बोदी में पत्ते पीले होने वाली बीमारी लग रही है तो इमिडाक्लोप्रिड 1 मिलीलीटर एक सप्ताह से 10 दिन के अंतराल पर दो से तीन छिड़काव करें। छिड़काव से पूर्व संक्रमित पौधों को उखाड़ कर मिट्टी में दबा देने से अच्छा रिजल्ट मिलता है। टमाटर फसल में फल छेदक किट के प्रबंधन हेतु अफ्रीकी गेंदा की अंतर्वत्ति खेती करें। कहीं-कहीं फलदार पौधों व पेड़ों में ऊपर से टहनी सूखने की बीमारी देखी जा रही है। इसके प्रबंधन हेतु सूखी हुई टहनियों को 6 इंच नीचे हरे भाग से कटाई कर इकट्ठा करके जला दें और पूरे पौधे व पेड़ पर 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम या कोई अन्य फफूंदनाशक का अच्छी तरह से छिड़काव करें।


