चार सूत्री मांगों को लेकर कल्याण मंत्री से आदि संस्कृति व विज्ञान संस्थान का मिला प्रतिनिधिमंडल

भास्कर न्यूज | चाईबासा आदि संस्कृति व विज्ञान संस्थान का एक प्रतिनिधिमंडल कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से रांची स्थित आवासीय कार्यालय में मुलाकात किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने चार सूत्री मांग पत्र ज्ञापन मंत्री को सौंपा। पत्र के माध्यम से कहा गया कि आदि संस्कृति एवं विज्ञान संस्थान, जोड़ापोखर, झींकपानी, प. सिंहभूम, झारखण्ड एक विशिष्ट संस्था है। जिसका पंजीकरण सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत तत्कालीन बिहार सरकार में 1976-77 में निबंधन संख्या 2/1976-77 है। झारखंड राज्य के अस्तित्व में आने के बाद संस्था का नवीकरण वर्ष 2005-06 में हुआ था। जिसका निबंधन संख्या 374/2005-06 है। आदिवासी समुदाय की यह संस्था आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान, भाषा- साहित्य, संस्कृति, परम्परा व रीति-रिवाजों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है। इस संस्था की स्थापना वर्ष 1954 में स्वर्गीय ओत गुरू कोल लोको बोदरा ने किया था। उन्होंने आदिवासियों के अस्तित्व पहचान एवं इतिहास आदि के संदर्भ में अनेक शोध एवं अनुसंधान किए थे। परन्तु दुर्भाग्य रहा कि संस्था के सुचारू संचालन में कमियों के कारण वर्तमान में संस्था जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। संस्था का अपना जमीन है। परन्तु किसी प्रकार का निर्माण कार्य सरकारी स्तर व समुदाय के स्तर पर नहीं हो पाया है। मंत्री को संस्था की नवगठित गवर्निंग बॉडी की ओर से लगभग 8 एकड़ जमीन की घेराबन्दी करवाने, संस्था में विभिन्न गतिविधियों के विधिवत संचालन हेतु एक सभागार भवन का निर्माण,आदिवासियों के शैक्षणिक विकास के लिए एक आवासीय विद्यालय के निर्माण की स्वीकृति और संस्था के अधीन 1992 में स्थापित हो भाषा शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, बडा झींकपानी के भवन की मरम्मती करायी जाए। साथ ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता हेतु ईस्टर्न रीजनल कमिटि, एनसीटीई से मान्यता हेतु ईस्टर्न रीजनल कमिटि, एनसीटीई भुवनेश्वर को आवेदित अधूरे कार्यों को पूरा करने में झारखण्ड सरकार द्वारा सहायता किया जाए। मंत्री चमरा लिंडा ने प्रतिनिधि मंडल की बातों को गंभीरता से लेते हुए जल्द मांग पत्र में उल्लेखित मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है।

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