चित्तौड़गढ़ जिले में शुक्रवार शाम को अचानक मौसम बदल गया। कई जगहों पर तेज बारिश हुई और साथ ही आकाशीय बिजली भी गिरी। इस दौरान मंगलवाड़ थाना क्षेत्र के छिपाखेड़ा गांव में हादसा हो गया। यहां खेत पर काम कर रहे 8 ग्रामीण आकाशीय बिजली की चपेट में आकर झुलस गए। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। हादसे के बाद घायलों को पहले मंगलवाड़ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद सभी को रात को चित्तौड़गढ़ जिला हॉस्पिटल रेफर किया गया। अब सभी घायल वहां भर्ती हैं और सभी डॉक्टरों की देखरेख में है। पुलिस और प्रशासन को भी इस घटना की जानकारी दे दी गई है। तिरपाल पर बिजली गिरी परिवार के ही सुरेश बावरी ने बताया कि शुक्रवार शाम को उसका परिवार खेत पर सोयाबीन की फसल काट रहा था। अंधेरा होने से पहले सभी लोग जल्दी-जल्दी फसल को इकट्ठा करने लगे। तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए सभी ने पास ही रखे प्लास्टिक के तिरपाल को ओढ़ लिया और वहीं बैठ गए। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ आकाशीय बिजली गिरी और सभी लोग उसकी चपेट में आ गए। बिजली गिरते ही सभी परिजन जोर से चिल्लाए और झुलस गए। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को संभाला। इसके बाद सभी को 108 एम्बुलेंस की मदद से मंगलवाड़ हॉस्पिटल पहुंचाया गया। संख्या ज्यादा होने के कारण जिला हॉस्पिटल भेजा मंगलवाड़ हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने घायलों का इलाज किया और उन्हें कुछ घंटों के लिए वही एडमिट कर लिया। लेकिन झुलसने वालों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें रात को चित्तौड़गढ़ जिला हॉस्पिटल भेज दिया गया। इसके लिए मंगलवाड़, भादसोड़ा और डूंगला से 108 एम्बुलेंस मंगवानी पड़ी। सभी घायल एक-एक कर एम्बुलेंस से चित्तौड़गढ़ लाए गए और श्री सांवलियाजी राजकीय सामान्य हॉस्पिटल में भर्ती करवाए गए। वहां डॉक्टरों की टीम ने सभी का इलाज शुरू किया और फिलहाल सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। 7 घायलों का इलाज जारी हादसे में घायल सुरेश (45) पुत्र हरिराम बावरी, चंदा (40) पत्नी सुरेश बावरी, कृष्णा (25) पत्नी संपत बावरी, संपत (27) पुत्र बाबूलाल बावरी, भारत पुत्र मिट्ठूलाल, लहरी बाई (60) पत्नी भीमजी बावरी, दिनेश (25) पुत्र बाबूलाल बावरी और राधा (22) पत्नी दिनेश बावरी शामिल हैं। सभी लोग खेत में काम कर रहे थे और अचानक हुए इस हादसे से बहुत डर गए। गांव के लोगों का कहना है कि अचानक हुई इस बारिश और बिजली गिरने से गांव में दहशत फैल गई। लेकिन राहत की बात यह है कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज चल रहा है।


