चित्तौड़गढ़ में श्रीसांवलियाजी की तर्ज पर बन रहा लक्ष्मीनारायण मंदिर:1800 स्क्वायर फीट क्षेत्र में होगा निर्माण, 21 फीट ऊंचा होगा शिखर

चित्तौड़गढ़ जिले में मंडफिया स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर की तर्ज पर लक्ष्मीनारायण भगवान का मंदिर बनाया जा रहा है। डूंगला उपखंड के कुम्हार खेड़ा गांव में यह मंदिर गांव के करीब 150 मेनारिया ब्राह्मण परिवारों की सामूहिक भागीदारी से तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मिलकर लगभग 80 लाख रुपए की लागत से यह मंदिर बनाने का संकल्प लिया है, जिसमें से अब तक करीब 60 लाख रुपए का काम पूरा किया जा चुका है। मंदिर का निर्माण करीब 1800 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल में किया जा रहा है और कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ था निर्माण काम इस मंदिर का विधिवत भूमिपूजन और शिलान्यास 22 फरवरी 2024 को किया गया था। इस मौके पर वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान हुए, जिसमें पूरे गांव के लोग शामिल हुए। उसी दिन से मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ, जो अब तक लगातार जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मंदिर को बनाने का उद्देश्य गांव में धार्मिक वातावरण को मजबूत करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था का केंद्र तैयार करना है। ग्रामीणों की एकजुटता से बन रहा मंदिर मंदिर निर्माण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पूरे गांव ने मिलकर बनाया है। गांव के करीब 150 परिवार अपनी-अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। किसी ने ज्यादा राशि दी तो किसी ने कम, लेकिन सभी ने इसमें भाग लिया। ग्रामीणों का मानना है कि यह मंदिर सामूहिक विश्वास, एकता और सहयोग का प्रतीक बनकर सामने आएगा। पारंपरिक शैली में हो रहा निर्माण मंदिर को पूरी तरह पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली में बनाया जा रहा है। पिछले करीब डेढ़ साल से चल रहे निर्माण काम में कारीगर मंदिर को सुंदर आकार दे रहे हैं। मंदिर का शिखर करीब 21 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है। मंदिर के स्तंभों, दीवारों और प्रवेश द्वार पर बारीक नक्काशी की जा रही है, जिससे मंदिर का स्वरूप आकर्षक और ऐतिहासिक नजर आता है। लाल पत्थर से तैयार हो रहा मंदिर पूरा मंदिर लाल पत्थर यानी रेड सैंडस्टोन से बनाया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती और सुंदरता दोनों बनी रहे। यह पत्थर कोटा के पास के क्षेत्र के काशा गांव से मंगवाया जा रहा है। निर्माण स्थल पर रोजाना करीब 8 से 10 मजदूर काम कर रहे हैं, जो सभी चित्तौड़गढ़ जिले के ही निवासी हैं। मजदूरों और कारीगरों की मेहनत से मंदिर धीरे-धीरे अपने अंतिम रूप की ओर बढ़ रहा है। लक्ष्मीनारायण और शिव परिवार की होगी स्थापना मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद इसमें भगवान लक्ष्मीनारायण सपत्नीक विराजमान होंगे। इसके साथ ही भगवान शिव अपने परिवार सहित मंदिर में स्थापित किए जाएंगे। ग्रामीणों को विश्वास है कि मंदिर बनने के बाद यहां नियमित पूजा-अर्चना, धार्मिक कार्यक्रम और त्योहार आयोजित होंगे।

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