भास्कर न्यूज | चिरमिरी प्रतिभा किसी आवाज की मोहताज नहीं होती, इस कथन को चिरमिरी की 10 वर्षीय मूक-बधिर बालिका वर्षा मिश्रा ने सच कर दिखाया है। वर्षा ने योग की नेशनल प्रतियोगिता में तीसरा रैंक प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम रोशन किया है। हल्दीबाड़ी स्थित मुकेश बाजार के संचालक मुकेश मिश्रा और ज्योति मिश्रा की बेटी वर्षा ने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो शारीरिक अक्षमताएं भी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं। वर्षा बचपन से ही बोलने और सुनने में असमर्थ है। योग के प्रति उसकी रुचि महज 6 साल की उम्र में कोलकाता भ्रमण के दौरान जागी। वहां कुछ बच्चों को योग करते देख वर्षा ने भी सीखने की इच्छा जताई, लेकिन उसे यह कहकर हतोत्साहित किया गया कि यह तुम्हारे बस की बात नहीं है। वर्षा ने इन तानों को चुनौती के रूप में लिया और खुद को साबित करने की ठान ली। वर्षा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उसने किसी औपचारिक ट्रेनिंग सेंटर या गुरु से योग नहीं सीखा। उसने केवल यू-ट्यूब वीडियो देख-देखकर योग के सबसे कठिन आसनों का अभ्यास किया। आज उसकी दक्षता ऐसी है कि वह बड़े-बड़े आयोजनों में दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देती है। वर्षा योग के साथ-साथ पेंटिंग और मेहंदी डिजाइनिंग में भी माहिर है। उसकी इसी अदम्य इच्छाशक्ति से प्रभावित होकर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं उसे सम्मानित कर चुके हैं। वर्षा के पिता मुकेश मिश्रा ने बताया कि 8 साल की उम्र में वर्षा का कॉक्लियर इम्प्लांट हुआ। चिकित्सकों के अनुसार यदि यह 5 साल से पहले होता, तो वह सामान्य बच्चों की तरह बोल पाती। वर्तमान में वह मां और पानी जैसे कुछ शब्द ही बोल पाती है, लेकिन उसका आत्मविश्वास किसी भी कमी को आड़े नहीं आने देता। वर्षा ने अब तक मैनपाट महोत्सव, झुमका महोत्सव (कोरिया), अमृतधारा महोत्सव, एसईसीएल व्यापार मेला (बिलासपुर) और न्यू दिगा (पश्चिम बंगाल) में हिस्सा ले चुकी है।


