चिरमिरी में यूथ क्लब द्वारा आयोजित 11वां वार्षिक बहुरूपिया महोत्सव उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य विलुप्त होती पारंपरिक बहुरूपिया कला को संरक्षण देना और नववर्ष को उल्लासपूर्ण बनाना था। कलाकारों ने अपनी अद्भुत भाव-भंगिमाओं और कलात्मक वेशभूषा से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतियोगिता में एकल और समूह वर्ग के कलाकारों ने भाग लिया। उन्होंने कांतारा, नरसिंह अवतार, मां काली, सांई बाबा, महारानी, कोयला श्रमिक, आदिवासी मुर्गा, योगा, भालू, प्रभु श्रीराम और यमराज जैसे विविध रूपों का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने ‘जंगल बचाओ’, ‘पर्यावरण संरक्षण’ और ‘माता-पिता की सेवा’ जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दिए। इन जीवंत प्रदर्शनों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज में जागरूकता भी फैलाई। महोत्सव में बहुरूपिया कलाकारों की अनोखी प्रस्तुति बहुरूपिया कलाकारों ने हल्दीबाड़ी के मुख्य मार्गों पर घूम-घूमकर अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिससे पूरे नगर में उत्सव का माहौल बन गया। विभिन्न स्थानों पर नियुक्त निर्णायकों ने कलाकारों का मूल्यांकन किया। महोत्सव देखने उमड़े जनसमुदाय ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। यह बहुरूपिया प्रतियोगिता तीन दशक पूर्व मनेन्द्रगढ़ में शुरू हुई थी और अब यह क्षेत्र की पहचान बन गई है। मनेन्द्रगढ़ के बाद चिरमिरी और खोंगापानी में भी इसका आयोजन होने लगा है। प्रतिभागियों को दिए गए पुरस्कार चिरमिरी में हुए इस आयोजन में कलाकारों के शानदार प्रदर्शन के बाद अतिथियों द्वारा प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए गए। एकल वर्ग में ‘योगा से होता है सभी बीमारी का हल’ विषय पर प्रस्तुति देने वाले कलाकार को प्रथम पुरस्कार मिला। वहीं, समूह वर्ग में ‘माता-पिता की सेवा कैसे करनी चाहिए’ विषय पर आधारित प्रस्तुति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागी कलाकारों को सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, चिरमिरी महापौर रामनरेश राय, पूर्व विधायक विनय जायसवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने अपने उद्बोधन में कहा, “यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।”


