चिलगा का मंजूरा गांव बरसात में बन जाता है टापू, नहीं बना है पुल

प्रकाश मिश्रा | गिरिडीह पीरटांड़ प्रखंड की चिलगा पंचायत का मंजूरा गांव। यह दोनों ओर से नदियों से िघरा। यहां 70 आदिवासी परिवार रहते हैं। लेकिन गांव में आने-जाने के िलए एक भी पक्की सड़क नहीं है। ऐसे मंें बरसात के समय में इनकी मुश्किलें काफी बढ़ जाती है। क्योंिक गांव की दोनों ओर बहनी वाली नदियों में पानी उफान पर रहता है। इसके कारण गांव के लोग कई दिनों तक टापू में फंस कर रह जाते हैं। हालांिक गांव के दोनों ओर नदी तक पहंुचने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है, जिसकी भी हालत इन दिनों काफी जर्जर है। गांव के एक ओर हरटकवा नदी बहती है, तो दूसरी ओर चिरकी नदी। हरकटवा नदी थोड़ी सकरी है, लेकिन चिरकी नदी बारिश की दिनों मंे काफी चौड़ी हो जाती है। ऐसे में एक गांव से दूसरे गांव जाने के िलए ग्रामीण को काफी परेशानी होती है। हालांिक इस समस्या को देखते हुए 2010 से पहले हरकटवा नदी पर पुल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तीन पीलर बनाए गए थे। लेकिन इसे अधूरा ही छोड़ िदया गया, िजसका अस्तित्व भी अब खत्म होने चला है। वहीं िचरकी नदी पर पुल बनाने के िलए अब तक कोई पहल ही नहीं हुई है। वहीं मंजूरा से पालगंज की दूरी करीब 7 किलोमीटर है, जो पास का बड़ा गांव है। उसके बाद करीब 2 किलोमीटर दूरी तय कर गिरिडीह-डुमरी मुख्य सड़क है। ऐसे मंे जिला मुख्यालय और प्रखंड मुख्यालय आने-जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। गांव के रहने वाले नौधा मरांडी, नियल टुडू, सुरेश टुडू और संजूल मुर्मू ने बताया कि बारिश के दिनों मंे गांव में अगर कोई बीमार हो जाए, तो डॉक्टर भी गांव में आना नहीं चाहते हैं। काफी मशक्कत के बाद खटिया में लेटाकर उसे नदी क्रॉस करना पड़ता है। हरकटवा नदी पार करने के बाद बरियारपुर होकर खुखरा के रास्ते पीरटांड़ ले जाते हैं। अगर गंभीर मरीज हो जाए, तो उसे किसी तरह लेकर गिरिडीह जाना होता हैै। अगर चिरकी नदी में पुल बन जाए, तो उन्हें ​गिरिडीह आने-जाने में काफी सहूलियत होगी। क्या कहते हैं पंचायत प्र​ि​तनिधि चिलगा पंचायत की मुखिया सोमी देवी और उप मुखिया सुनील मरांडी ने बताया कि विधानसभा चुनाव से पूर्व चिरकी नदी में पुल बनाए जाने को लेकर मिट्‌टी का टेस्ट भी हुआ था। उस दौरान लगा था कि चुनाव के दौरान ही पुल का निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुल के साथ बरियारपुर से मंजूरा, करंगों होकर पालगंज तक सड़क के भी जीर्णोद्धार की जरुरत है, तभी इस इलाके के लोगों की परेशानी दूर होगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *