चिल्फी-रेंगाखार सड़क में खराब सामग्री का उपयोग

भास्कर न्यूज | चिल्फी क्षेत्र के चिल्फी-रेंगाखार सड़क निर्माण वर्षों से केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। हर चुनाव में नेताओं द्वारा बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी ग्रामीणों को बदहाल सड़क से जूझना पड़ रहा है। ताजा निर्माण कार्य में भी वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है। यहां घटिया गुणवत्ता और प्रशासनिक उदासीनता दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण में जगह-जगह केवल गिट्टी बिछाकर खानापूर्ति की जा रही है। घटिया गुणवत्ता का डामर इस्तेमाल हो रहा है और पुरानी, जर्जर सड़क को उखाड़े बिना उसी के ऊपर डामर डाल दिया जा रहा है, जिससे सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है। सड़क के बन जाने के बाद भी ये ज्यादा दिन तक नहीं चल सकेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र वन विभाग, लोक निर्माण विभाग व प्रशासन के बीच तालमेल की कमी का शिकार बन गया है। वर्षों से सड़क निर्माण व सुधार के नाम पर फाइलें घूमती रहीं, लेकिन वन विभाग की अनुमति और प्रशासनिक लापरवाही के चलते कार्य या तो रुका रहा या फिर अधूरा और घटिया तरीके से कराया गया। न तो समय पर तकनीकी जांच हुई, न ही गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान दिया गया। परिणामस्वरूप आज भी आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। बारिश मे परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया,ताकि हर चुनाव में इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। अब जब निर्माण हो भी रहा है, तो उसमें भी सरकारी धन की खुली बर्बादी नजर आ रही है। लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच, डामर और गिट्टी की क्वालिटी टेस्टिंग तथा वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *