सीजी बोर्ड के रिजल्ट पर स्कूल शिक्षा विभाग की नजर है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने खुद इसकी कमान संभाली है। पिछले 15 दिनों के भीतर मंत्री ने तीन संभागों की बैठक ली और दसवीं का परिणाम 85 प्रतिशत और बारहवीं का 90 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया। मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि लक्ष्य केवल पास होने तक सीमित ना रहे, छात्र उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण हो इस दिशा में प्रयास किए जाएं। मंत्री के इस निर्देश के बाद स्कूलों में अब रिजल्ट सुधारने को लेकर कवायद शुरू हो गई है। पिछली बार दसवीं का रिजल्ट 76.83 फीसदी था, 85 फीसदी लक्ष्य पाने के लिए रिजल्ट में 8 फीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए। बारहवीं का रिजल्ट 81.87 फीसदी था, 90 फीसदी लक्ष्य के लिए इसमें भी 8 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि होनी चाहिए। स्कूलों पर दबाव- पांच साल के प्रश्न पत्र हल करा रहे स्कूल: बोर्ड के रिजल्ट बढ़ाने को लेकर स्कूल वाले भी दबाव में हैं। रायपुर जिले में कुछ महीने पहले से ही कवायद शुरू है। हर महीने छात्रों का टेस्ट लिया जा रहा है। अब स्कूल शिक्षा मंत्री ने भी लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। इसे लेकर स्कूल छात्रों से पांच साल के प्रश्न पत्र हल करा रहे हैं। उनका मानना है कि इसमें से 50 प्रतिशत प्रश्न आते हैं, छात्र इसका अभ्यास अच्छे से कर लेंगे तो पास हो जाएंगे। 15 दिनों में स्कूल शिक्षा मंत्री ने तीन संभागों की समीक्षा बैठक ली लक्ष्य ऐसा न हो जिससे दबाव बढ़े व गुणवत्ता पर असर पड़े
माध्यमिक शिक्षा मंडल के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व अपर मुख्य सचिव बीकेएस.रे का कहना है कि रिजल्ट को लेकर जो भी लक्ष्य निर्धारित किया जाए, वह वास्तविकता पर आधारित होना चाहिए। टारगेट ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे स्कूलों पर दबाव बढ़े और गुणवत्ता पर असर पड़े। बगैर विषय काे अच्छे से जाने-समझे सिर्फ रटकर यदि छात्र पास भी हो जाएंगे तो वे आगे प्रतिस्पर्धा में पीछे हो जाएंगे। शिक्षा विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए कि बच्चे को किस तरह से गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराया जाए।


