चूरू के डीबी अस्पताल में पिछले 22 महीनों में 7 हजार 90 रोगियों की सफल सर्जरी की गई है, जिससे अस्पताल की छवि में सुधार आया है। आमतौर पर सरकारी अस्पतालों से जुड़ी अव्यवस्थाओं की धारणा के विपरीत जिले के इस सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में व्यवस्थाएं बेहतर हुई हैं। इन ऑपरेशनों में सर्जन डॉक्टरों की टीम ने 1532 सर्जरी कीं। वहीं, नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम ने सर्वाधिक 3768 ऑपरेशन किए, जिनमें से 3577 प्रमुख (मेजर) ऑपरेशन थे। इन सभी सर्जरी को आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया गया। पिछले 22 महीनों में अस्पताल में कुल 14 लाख 28 हजार 12 रोगियों का इलाज किया गया। अकेले वर्ष 2024 में 32 हजार 224 रोगियों को भर्ती कर उपचार प्रदान किया गया। अस्पताल में रेफरल दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। डीबी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में वर्ष 2024 में 1374 रोगियों को भर्ती किया गया था, जिनमें से 504 को रेफर किया गया। इसके विपरीत वर्ष 2025 में 31 अक्टूबर तक 1285 रोगियों को भर्ती किया गया, और इनमें से केवल 260 को ही रेफर करना पड़ा। इस प्रकार वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में 244 कम रोगियों को रेफर किया गया। अस्पताल से रेफर होने वाले रोगियों की संख्या में यह कमी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एमएम पुकार के प्रयासों का परिणाम है। जनवरी 2025 में डॉ. पुकार को फिर से कॉलेज प्रिंसिपल बनाया गया, जिसके बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार हुआ। वर्ष 2024 की अपेक्षा 2025 में रेफरल अनुपात में 45 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में हुई कई बड़ी सर्जरी डीबी अस्पताल के वर्ष 2024 व 2025 के अक्टूबर माह तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 20 महिनों में 1432 सर्जरी हुई हैं। जिनमें कई जटिल ऑपरेशन कर रोगियों की जान बचाई गई हैं। वर्ष 2024 की अपेक्षा 2025 में 196 सर्जरी अधिक हुई हैं। जिससे अस्पताल की रेवन्यू भी बढ़ी हैं। इसके अलावा ईएनटी विभाग में भी सर्जरी की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024 में जहां 150 ऑपरेशन हुए। वहीं, 2025 में अक्टूबर माह में 287 ऑपरेशन हुए हैं। ऑर्थोपेडिक विभाग में भी वर्ष 2024 में 454 सर्जरी हुईं। वहीं, 2025 में 593 सर्जरी हुई हैं। जिनमें कई बड़ी मेजर सर्जरी भी हुई हैं। एमसीएच में हुई सर्जरी की संख्या में आई गिरावट जिले में सबसे बड़ा एकमात्र मातृ शिशु अस्पताल जो की चूरू में स्थित हैं। राज्य सरकार जहां अनेक योजनाएं चलाकर प्रसूता व नवजात को संबल दे रही हैं। मगर एमसीएच में वर्ष 2024 की अपेक्षा 2025 में कम सर्जरी हुई हैं। जो की चिंता का विषय हैं। सरकारी अस्पताल में जहां रोगियों को हर संभव सुविधा मिल रही हैं। इसके बावजूद सर्जरी की संख्या में कमी होना सोचने वाली बात है। वर्ष 2024 में 185 डिलीवरी सर्जरी के द्वारा हुई। वहीं 2025 में मात्र 182 डिलीवरी सर्जरी के द्वारा हुई हैं। मेडिसिन विभाग ने 22 महीने में भर्ती किये करीब 12 हजार रोगी अस्पताल के मेडिसिन विभाग ने गत दो वर्षों में काफी अच्छा काम किया हैं। मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों की अच्छी टीम हैं। टीम ने 22 महीने में 11 हजार 841 रोगियों को अस्पताल में भर्ती किया हैं। 22 महीने में मेडिसिन विभाग की ओर से केवल 872 रोगियों को हायर सेंटर रेफर किया गया। वर्ष 2024 में 6407 रोगियों को भर्ती किया गया। वहीं वर्ष 2025 में 31 अक्टूबर तक 5434 रोगियों को भर्ती कर इलाज किया गया। गत वर्ष 2024 में 572 रोगियों को रेफर किया गया। जबकि 2025 में मात्र 300 रोगियों को रेफर किया गया है। गत वर्ष की अपेक्ष इस वर्ष 272 कम रोगियों को रेफर किया गया हैं। 22 महीनों में हुए 37 लाख 26 हजार 973 टेस्ट डीबी अस्पताल के सेंट्रल लैब की बात की जाए तो देखा जा सकता है कि 22 महीनों में एक लाख 88 हजार 80 रोगियों की 37 26 हजार 973 टेस्ट किये जा चुके हैं। वर्ष 2024 में 96 हजार 723 रोगियों के 18 लाख 63 हजार 199 टेस्ट हुए। वहीं, वर्ष 2025 में 31 अक्टूबर तक 91357 रोगियों के 18 लाख 63 हजार 774 टेस्ट करवाए गए हैं। अस्पताल में फिलहाल सभी प्रकार के टेस्ट होते हैं। मगर कुछ टेस्ट जांच मशीन में काम आने वाले रिजेंट की कमी के कारण बाहर कराए जाते हैं। इसके अलावा सभी टेस्ट अस्पताल में करवाए जाते हैं। डाॅ. पुकार के आने के बाद बदलने लगी अस्पताल की तस्वीर जनवरी 2025 में डाॅ. एमएम पुकार ने प्रिंसिपल के रूप में मेडिकल काॅलेज में जोइन किया था। उस समय मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में अस्पताल की आय करीब 50 से 60 लाख रूपए थी। डाॅ. पुकार के जोइन करने के बाद यह बढ़कर करीब एक करोड़ 20 लाख रूपए तक पहुंच चुकी हैं। बैड ऑक्यूपेंसी पहले 45 प्रतिशत थी, जो अब 70 प्रतिशत हो चुकी हैं। लंबे समय से लंबित पड़े ब्लड बैंक के लाइसेंस को रिन्यू भी डाॅ. पुकार ने आकर करवाया हैं। क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट प्रमाण पत्र भी रिन्यू करवाया गया है।


