राजस्थान प्रदेश में सीएम और मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाओं पर पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व हरियाणा प्रदेश के प्रभारी सतीश पूनिया ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दूल्हा तय होने के बाद इतनी जल्दी बदल जाएगा। अब तो पांच साल का आकलन ही होगा। इसके अलावा मंत्रिमंडल फेरबदल पर बोले कि इसकी घोषणा होने तक इंतजार करना चाहिए। यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। सतीश पूनिया सोमवार को अलवर में गीतांजलि अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। यहां पूनिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। इस तरह दिए चर्चा में चल रहे सवालों के जवाब – राजस्थान में सब ठीक ठाक है तो मंत्रिमंडल बदलाव के अलावा सीएम बदलने की चर्चा क्यों है? मुझे नहीं लगता है कि दूल्हा तय हो जाए और बदल जाए। इतना जल्दी नहीं। यह काल्पनिक सवाल है। चर्चाओं को कोई रोक नहीं सकता है। मीडिया सोशल मीडिया बढ़ गया। इसकी चौपाल चौराहों पर चर्चा होती है। लेकिन बीजेपी का चरित्र है वह व्यक्तियों का अवसर देती है। वे अपना काम करें। इसका आकलन तो सरकार के पांच साल पूरे होने के बाद ही होगा। राजस्थान में सतीश पूनिया का कद बढ़ने वाला है? ऐसे मैसेज आपके कार्यकर्ताओं की ओर से चल रहे हैं? मैंने सामान्य कार्यकर्ता की हैसियत से जीवन शुरू किया। सिखाया भी यही गया कि संगठन की प्राथमिकता से काम करना है। कद व पद की चर्चा हमेशा रहती है। मुझे लगता है कार्यकर्ता का भाव स्थाई है। यह रहता है। राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं का बाजार गर्म है। आप क्या मानते हैं? इस युग में मीडिया व सोशल मीडिया की राजनीतिक गोशिप खबरों का रूप ले लेती है। बीजेपी में अधिकारिक घोषणा नहीं होने ते ये काल्पिनक सवाल है। मुझे लगता है अभी इंतजार करना चाहिए। हरियाणा के बाद बिहार की जीत को भी कांग्रेस नहीं पचा पा रही है क्यों? कांग्रेस को नीति व व्यवहार से जनता ने नकार दिया है। एक समय था कांग्रेस की तूती बोलती थी। समय बदला तो इंदिरा गांधी जैसी तानाशाह को जनता ने उखाड़ फेंका था। कांग्रेस ने चाल, चरित्र व चेहरा नहीं बदला। नई पीढ़ी के मुद्दों को नहीं समझा। राहुल गांधी व मोदी की सोच कोसों दूर हैं। अब तो शंका यह है कि कांग्रेस का रिवाइल कैसे होगा। कांग्रेस खुद अपने दुखों का कारण है। उनकी राजनीति भ्रम, भुलावे व जाति की राजनीति है। जिसे जनता ने नकार दिया है। चुनाव आजकल प्रबंधन है। देश में प्रधानमंत्री मोदी पर भराेसा है। क्यों जरूरत पड़ रही है मंत्रिमंडल फेरबदल करने की 1952 से लेकर अब तक देश में सरकार व नेतृत्व बदलता रहा है। सरकार में और ज्यादा क्षमतावान लोगों को अवसर मिलता है। यह सामान्य प्रक्रिया है। गुजरात में बदलाव भी अपवाद नहीं था। अंता में चुनाव जीतकर कांग्रेस के नेता कहने लगे हैं कि पर्ची की सरकार के बस में राजस्थान नहीं है। इसलिए बदलावा हो रहा है? ऐसा नहीं है एक हार से निर्णय नहीं होते हैं। कई राज्यों में कांग्रेस बाहर हो गई। बिहार में बीजेपी को बड़ी जीत मिली है। एक अंता के उप चुनाव से प्राणवायु नहीं मिलने वाली है। अलवर में अपराध तेजी बढ़ गया है। बीजेपी सरकार अपराध को रोक नहीं पा रही है? ऐसा नहीं है पिछली सरकार के मुकाबले अपराध में गिरावट आई है। नए डीजीपी बने हैं। उनका भी कानून व्यवस्था पर फोकस रहा है। पुलिस के अधिकारियों की प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग हुई है। महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर फोकस है। आगे आने वाले समय में कानून व्यवस्था सुनिश्चित होगी। एसआईआर के जरिए कांग्रेस के पक्ष के वोट काटे जा रहे हैं। कांग्रेस नेता लगातार ये आराेप मंढ रही है? एसआईआर को कांग्रेस नकारात्मक रूप से पेश कर रही है। जबकि ये सकारात्मक विषय है। मैं समझता हूं एसआईआर ही कांग्रेस की हार का कारण है। जबकि एसआईआर से वोटर की डुप्लीकेसी को खत्म होती है। मृत व्यक्ति के वोट हट जाएंगे। आर्गेनिक वाेट ही बचेगा। बिहार में 60 लाख वोट कटे हैं। अवैध वोट पर अंकुश लगे। वैध वोटर को पूरा हक मिले। एसआईआर किसी पंथ या मजहम के खिलाफ नहीं है। साइबर अपराध के मामले में वसूली होने लगी है। यहां बड़ी चर्चा रहने लगी है? साइबर अपराध पर ठीक से काम करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री खुद इस पर बराबर चिंता करते हैं। आने वाले समय में ये सब चिंता सरकारों की है।


