श्रीगंगानगर| शहर में एक प्राइवेट स्कूल संचालक पर बिना मान्यता स्कूल चलाने, नाम बदलकर एडमिशन देने और फर्जी टीसी जारी करने का आरोप लगा है। वर्ष 2024-25 में कक्षा 10 में बच्चे को एडमिशन दिलाने वाले एक अभिभावक की शिकायत पर मामला तब सामने आया था जब बच्चे की टीसी मांगी गई और डॉक्यूमेंट फर्जी पाए गए थे। गुरुवार शाम को न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सदर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सूरतगढ़-पदमपुर बाइपास मार्ग पर राधास्वामी डेरे के पास स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल से जुड़ा है। सेतिया कॉलोनी की गली नंबर 10 निवासी अरुण अरोड़ा ने स्कूल प्रबंधन पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपी व्यक्तियों में स्कूल की सीईओ एवं डायरेक्टर सुषमा बोपाना, प्रिंसिपल प्रत्यूषा, प्रबंध समिति सदस्य रजनीकांत, कुलदीप और चंद्रमोहन शामिल हैं। सदर थाना पुलिस ने बताया कि अरुण अरोड़ा ने अदालत में दायर इस्तगासे के आधार पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच की जिम्मेदारी हवलदार सत्यनारायण को सौंपी गई है। अरुण अरोड़ा ने बताया कि उसके बेटे आदित्य को वर्ष 2025-26 के लिए इस विद्यालय में दसवीं कक्षा में प्रवेश दिया गया था। स्कूल ने फीस और किताबों के रूप में कुल 71 हजार 918 रुपए वसूले थे। अरोड़ा का आरोप है कि आरोपी व्यक्तियों ने बिना वैध मान्यता के फर्जी दस्तावेज दिखाकर उन्हें और अन्य अभिभावकों को गुमराह किया तथा बच्चों को स्कूल में दाखिला दिया। जब अरोड़ा को स्कूल की गैर-मान्यता प्राप्त स्थिति का पता चला तो उन्होंने अपने बेटे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) मांगा। आरोप है कि आरोपियों ने पुरानी तारीख 13 अगस्त 2025 के हस्ताक्षरों वाला फर्जी टीसी जारी किया, जो उन्हें 29 अगस्त 2025 को सौंपा गया। स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं था, इसलिए आरोपी टीसी जारी करने के योग्य नहीं थे। इनसाइड स्टोरी: श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल के खिलाफ अभिभावकों ने धरना-प्रदर्शन भी किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के निदेशक एवं अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा अभियान) ने जांच करवाई गई थी। जांच में पुष्टि हुई कि स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहा था। इस पर निदेशालय ने स्कूल पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया और कक्षा 9 से 12 तक के संचालन को एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया। अरोड़ा ने बताया कि आरोपियों ने स्कूल का नाम बदलकर ब्राइटलैंड्स कॉन्वेंट स्कूल कर दिया, लेकिन इसके लिए शिक्षा विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई।


