चौड़ी बन रही सड़क पर ड्रेनेज के लिए जगह नहीं:नाले पर बनीं निगम की 64 दुकानें, 280 निर्माण ऐसे जो 3 से 5 फीट के बचे, ये हटें तो 4 मीटर चौड़ी हो सड़क

शहर में नालों पर बने निर्माण को हटाने में नगर निगम के फेल होने की वजह, निगम ही है। दरअसल, नगर निगम ने खुद नाले पर निर्माण कर रखा है। नाले पर दुकानें बनाई गई हैं, वह भी एक या दो नहीं, पूरीं 64 दुकानें। गल्ला मंडी की दीवार से लगकर रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर-2 स्टेशन रोड पर यह दुकानें बनी हैं। नगर निगम प्रशासन इन्हें बचाने के फेर में स्टेशन रोड को चौड़ा नहीं बनवा पा रहा है। जबकि यह दुकानें हटें तो 3 मीटर तक की जगह निकल आए। इसी तरह इसी रोड की दूसरी तरफ 280 ऐसे निर्माण तोड़े और लोगों से स्वेच्छा से तुड़वाए गए हैं जो अब 4 से 5 फीट गहराई के ही बचे हैं। यानी इनमें अब न तो कोई वाहन खड़ा करके सुधारा जा सकता है, न ही दुकानों का पूरा सामान ही वहां अच्छे से रखा जा सकता है। ऐसे में जाहिर है यहां पर जब वाहन सुधरेंगे तो सड़क पर ही सुधरेंगे। निगम अपनी दुकानें हटाए और टूटे हुए निर्माण पूरी तरह से साफ करे तो यह सड़क 14 से बढ़कर 18 मीटर चौड़ी हो सकती है। जिसमें पाथ-वे और ड्रेनेज को दोनों तरफ बनाया जा सकता है। निर्माण नहीं हटाए तो भगवानगंज- कबूलापुल सड़क जैसे हालात बनेंगे: स्टेशन रोड स्मार्ट सिटी द्वारा बनवाई जा रही है। दोनों ओर पाथ-वे, ड्रेनेज बनाने भी जगह अब नहीं है। ऐसे में जब सड़क किनारे ही 3 से 5 फीट गहराई की दुकानें छोड़ दी जाएंगी, तो जिस तरह से कबुलापुल से राहतगढ़ बस स्टैंड, भगवानगंज-अप्सरा टॉकीज रोड पर चौड़ीकरण के बाद दिनभर गैराज चलते हैं, वैसे ही यहां के हालात भी हो सकते हैं। 30 साल पहले बनीं थी दुकानें, अब ट्रैफिक कई गुना बढ़ गया मंडी की दीवार से लगकर जो दुकानें बनीं, वे 1995-96 में बनवाई गई थीं। उस समय यहां पर ज्यादा ट्रैफिक नहीं होता था। तब गल्ला मंडी भी यहीं थी। ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक सहित विभिन्न वाहन यहां आते और यहीं सुधरते। जब यहां ट्रैफिक बढ़ने लगा तो गल्ला मंडी शहर से बाहर खुरई रोड पर चली गई। यहां दुकानें चलाने वालों में से अधिकांश ने करीला एवं मंडी के आसपास अपनी दुकानें बना लीं और अब दोनों जगह संचालन कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट एवं मैकेनिकल नगर में इन सभी को शिफ्ट करने का प्रस्ताव भी बना था, परंतु यह ट्रांसपोर्ट नगर अब तक शुरू नहीं होने से यह मामला अटक गया। कगदयाऊ रोड स्मार्ट सिटी से बनने के बाद अब यहां आवागमन कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण बेहद जरूरी हो गया है। निगम को मात्र 4 लाख रुपए किराया, इससे ज्यादा स्वच्छता पर खर्च नगर निगम यदि इन दुकानों को हटाता है तो उसे राजस्व का नाममात्र का ही नुकसान होगा। जो 64 दुकानें यहां पर हैं। उनमें से 17 दुकानों का किराया 2500 रुपए प्रतिमाह है। जबकि 45 दुकानों का किराया 5 से 6 हजार रुपए प्रतिमाह है। 12 दुकानें ऐसी हैं, जिनका किराया 7 से 8 हजार रुपए प्रतिमाह के बीच आता है। इन सबका औसत किराया 4 लाख रुपए प्रतिमाह बनता है। यह सभी मैकेनिकल्स से जुड़ी दुकानें हैं। इनसे रोजाना ऑइल, पुरानी सामग्री आदि के रूप में जो कचरा निकलता है, उसी की सफाई करने में निगम को माहभर में इससे ज्यादा पैसे इस क्षेत्र में सफाईकर्मियों, मशीनरी को लगाने पर करने पड़ते हैं। यानी दुकानें हटने से निगम को बड़ी राजस्व हानि भी नहीं होना है। अधूरे निर्माण तोड़े, 30 मिनट चला विरोध सड़क किनारे अधूरा निर्माण छोड़ने पर लगातार सवालों में घिर रहे नगर निगम ने ऐसे निर्माणों को तोड़ना शुरू कर दिया। मंगलवार को आधा दर्जन अधूरे निर्माण जेसीबी से ढहा दिए गए। इस बीच 30 से 40 लोगों ने राधा तिराहा पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया। आश्वासन के बाद वे वापस लौट गए। निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने बताया कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए जो जरूरी होगा, वह काम किया जाएगा। सुगम यातायात व्यवस्था के लिए काम, सब सहयोग करें विधायक शैलेंद्र जैन ने बताया शहर में यातायात को सुगम बनाने हम सब काम कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट नगर में आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी तरह मैकेनिक नगर में भी आवंटन की प्रक्रिया शुरू है। ट्रांसपोटर्स वहां जाएंगे तो मैकेनिक को भी वहां जाना पड़ेगा। नगर हित में सबको सहयोग करना चाहिए।
चौड़ीकरण जरूरी, दुकानदारों को विस्थापित करेंगे महापौर संगीता सुशील तिवारी का कहना है कि शहर में जिस तरह से ट्रैफिक बढ़ रहा है, सुगम यातायात के लिए सड़क चौड़ीकरण भी जरूरी है। मैकेनिकल्स के दुकानदारों को ट्रांसपोर्ट एवं मैकेनिक नगर में शिफ्ट करने का निर्णय पहले ही हाे चुका है, वहां उन्हें दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी।

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