छतरपुर में मूलभूत सुविधाएं नहीं, पर 10 साल में सातवीं बार लग रही लाइट

राजीव कुमार | छतरपुर शहर के लोग मूलभूत सुविधा बिजली, पानी, स्वास्थ्य,शिक्षा और साफ सफाई के लिए तरस रहे है और 10 साल में सातवीं बार लाइट लगाई जा रही है। छतरपुर अनुमंडल मुख्यालय में 3 करोड़ 71 लाख की लागत से शहर में 620 तिरंगा लाइट लगाई जा रही है जिसका उद्घाटन 25 सितंबर को राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के द्वारा किया जाना है। मजेदार तो यहा िक एक ही स्थान पर चार चार लाइट लगाई जा रही हैं, तो कहीं कहीं दो फीट के अंतराल में दो खंभे है। दो वर्ष पूर्व नगर पंचायत कार्यालय के द्वारा शहर के प्रत्येक बिजली के खंभे में एलईडी लाइट लगाई गई थी और ठीक उसी खंभे के बगल में तिरंगा लाइट लगाई गई है जो चर्चा का विषय बना हुआ है। दस वर्ष पूर्व तत्कालीन सांसद बीडी राम के द्वारा सोलर युक्त लाइट लगाई गई ठीक कुछ माह बाद तत्कालीन विधायक सह वर्तमान के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के द्वारा लाइट लगाई गई, जिसकी देखरेख नहीं होने के कारण उसमें लगी बैटरी और सोलर प्लेट की चोरी हो गई। उसके बाद निर्वतमान मुखिया के द्वारा 14 वें वित्त के फंड से लाइट लगवाई गई और फिर नगर पंचायत का गठन होते से लाखों की प्राक्कलन से कई स्थानों पर हाइ मास्ट लाइट लगवाई गई तो उसके कुछ माह के पश्चात कार्यपालक पदाधिकारी के द्वारा प्रत्येक बिजली के खंभे में लाइट लगवाई गई जबकि इसी वर्ष पूर्व उपायुक्त शशि रंजन के द्वारा डीएमएफटी फंड से लाइट लगाने की योजना स्वीकृत कर संवेदक को बिना काम किए दो करोड़ का भुगतान कर दिया गया। जिसके तहत शहर में 165 लाइट लगाई जानी थी, जिसके लिए संवेदक ने शहर में सड़क किनारे फाउंडेशन तैयार किया ही जा रहा था, तो किसी अधिकारी ने उक्त कार्य को रोक दिया क्योंकि शहर में तिरंगा लाइट लगाने के लिए टेंडर स्वीकृत कर दी गई थी। विगत दस वर्षों में सातवीं बार लाइट लगाई जा रही है जबकि पूर्व में लगाई गई अधिकतर खराब हो चुकी है या चोरी कर ली गई । नगर मुख्यालय में स्थानीय लोग मूलभूत सुविधा से वंचित है।लोगों को पेयजल की समस्या से प्रतिदिन जूझना पड़ता है,हर एक घर में प्रतिदिन कम से कम सौ रुपया का पानी खरीदना पड़ता है जबकि गर्मी के दिनों में पानी की इतनी किल्लत हो जाती है कि लोगों को टैंकर से पानी खरीद कर रसोई से लेकर शौचालय के लिए व्यवस्था करते है और जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं वे रात रात जागकर सड़क किनारे लगे चापानल पर लंबी कतार लगाकर व्यवस्था करते है। वहीं स्वास्थ्य के लिए अनुमंडलीय अस्पताल का भव्य भवन है पर डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को निजी क्लिनिक और अस्पतालों में जान जोखिम कर इलाज कराते है वहीं अस्पताल में जांच से लेकर एक्सरे,अल्ट्रा साउंड और ब्लड बैंक की सुविधा नहीं होने से काफी परेशानी होती है। वहीं किसी घटना में मारे गए व्यक्तियों के शव का पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल होने के बावजूद व्यवस्था नहीं इसके लिए 50 किलोमीटर दूर मेदिनीनगर जाना पड़ता है शहर वासी बस स्टैंड और टेम्पु स्टैंड नहीं होने के कारण रोजाना जाम की समस्या से जूझते है जबकि अनुमंडल मुख्यालय एक भी बालिका उच्च विद्यालय और इंटर कॉलेज नहीं होने से हजारों बच्चियां निजी विद्यालय में पढ़ने को विवश है।

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