छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी:राजनांदगांव में कांग्रेस बोली- डेढ़ साल में चौथी बार बढ़े दाम, जनता को लूट रही भाजपा सरकार

छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि डेढ़ साल के भीतर यह चौथी बार है जब राज्य की भाजपा सरकार ने बिजली के दाम बढ़ाकर आम जनता की जेब पर सीधा बोझ डाला है। जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष भागवत साहू और शहर अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि भाजपा सरकार लगातार बिजली उपभोक्ताओं को लूटने का काम कर रही है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा ने बताया कि 2003 में छत्तीसगढ़ में घरेलू उपभोक्ताओं को 3 रुपए 30 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती थी। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में यह दर बढ़कर 6 रुपए 40 पैसे हो गई। 2018 के चुनाव वर्ष में इसमें मात्र 20 पैसे की कमी की गई। छाबड़ा के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में केवल दो पैसे की वृद्धि की। कांग्रेस सरकार ने बिजली बिल माफी योजना के तहत 65 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को 3240 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी थी। कांग्रेस का आरोप- आम जनता पर लादा जा रहा बेवजह का बोझ जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष भागवत साहू ने कहा, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के किसानों को 5 एचपी तक बिजली बिल्कुल मुफ्त दी जाती थी। वहीं, बीपीएल परिवारों को हर माह 40 यूनिट तक निःशुल्क बिजली की सुविधा दी गई थी। अस्पतालों और उद्योगों को भी सब्सिडाइज्ड दर पर बिजली प्रदान कर उन्हें राहत दी गई थी। इससे एक ओर किसानों की लागत कम होती थी, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक संबल मिलता था। भागवत साहू ने कहा, भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही राज्य भर में बिजली की अघोषित कटौती शुरू हो गई और बिजली दरें लगातार बढ़ाई जाने लगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छत्तीसगढ़ में कोयला, पानी और जमीन सब प्रदेश की संपत्ति है, तो आम उपभोक्ताओं को महंगी दरों पर बिजली क्यों दी जा रही है? वहीं भाजपा के नेता, मंत्री, विधायक और अफसर एसी की ठंडक में मजे कर रहे हैं, जबकि जनता भारी-भरकम बिल चुका रही है। बिजली चोरी और लाइन लॉस के मामले तेजी से बढ़े उन्होंने आरोप लगाया कि कई सरकारी विभागों ने वर्षों से बिजली बिल जमा नहीं किया है। सरकारी उपक्रमों और भाजपा से जुड़े प्रभावशाली लोगों के करोड़ों रुपये के बिजली बिल लंबित हैं, लेकिन इनसे वसूली करने के बजाय सरकार आम जनता से उसका भार वसूल रही है। सत्ता संरक्षण में बिजली चोरी और लाइन लॉस के मामले भी तेजी से बढ़े हैं, और इस नुकसान की भरपाई भी आम उपभोक्ता से की जा रही है। इसके अलावा, कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों को भी बिजली महंगाई का दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि कोयले पर ग्रीन टैक्स चार गुना बढ़ा दिया गया है, रेलवे माल भाड़ा भी बढ़ाया गया है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत बढ़ रही है। डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज) में वृद्धि से बिजली उत्पादन और परिवहन की लागत में भी भारी इजाफा हुआ है। प्रदेश भर से उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर के नाम पर अत्यधिक बिजली बिल थमाया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह सब योजनाबद्ध ढंग से जनता को आर्थिक रूप से परेशान करने की एक कड़ी है।

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