छत्तीसगढ़ में अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति ने यूजीसी कानून के विरोध में छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें UGC के नियम वापस नहीं लेने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह नियम भेदभाव पूर्ण है, जिससे सामान्य वर्ग के बच्चों को भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। लोकभवन में संगठन की विधि प्रकोष्ठ प्रदेश प्रमुख एडवोकेट निवेदिता मिश्रा एवं एडवोकेट राजीव द्विवेदी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन के माध्यम से कानून पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
अध्यक्ष बोले-भविष्य के लिए घातक इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष योगेश तिवारी ने कहा कि यूजीसी कानून सवर्ण समाज के छात्रों के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून के दुरुपयोग से छात्रों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संगठन ने बताया कि राज्यपाल के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम भी ज्ञापन प्रेषित किया गया है।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो विधि सम्मत आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान एडवोकेट निवेदिता मिश्रा, एडवोकेट राजीव द्विवेदी सहित वीरेंद्र पाण्डेय, सुनीता तिवारी, श्वेता मिश्रा, विमल ओझा, अविनाश मिश्रा, सुभाष तिवारी, राजू महाराज, अवधेश धर दीवान समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।
UGC के नए नियमों का विरोध क्यों? UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सिफारिश की थी सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ के गठन को अनिवार्य करने की सिफारिश संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने की थी।
इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व CM दिग्विजय सिंह हैं। समिति में कुल 30 सदस्य हैं, जिनमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 9 सांसद शामिल हैं। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद शामिल हैं।
देशभर के अलग अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन
देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज है। मंगलवार को नई दिल्ली में UGC हेडक्वार्टर के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को कैंपस के अंदर घुसने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग की गई।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और कई संगठनों ने जगह-जगह प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजी हैं। यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। UGC के नए नियमों को लेकर कुमार विश्वास ने तंज कसते हुए X पोस्ट में लिखा- चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मामले पर कहा कि किसी को भी इसका गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। वहीं नियम के खिलाफ वकील विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें नियम पर रोक, सभी छात्रों के लिए समान अवसर, इक्विटी हेल्पलाइन सुविधाएं देने की मांग की गई है।


