छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले में न्यायिक रिमांड पर रायपुर जेल में पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा से कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने EOW की स्पेशल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई है। आज दोपहर लंच के बाद इस मामले में कोर्ट में सुनवाई होगी। गौरतलब है कि शराब लखमा शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय मामले की जांच कर रही है। ED के साथ ही EOW की टीम भी इस मामले में जांच कर रही है। पूर्व मंत्री को आशंका है कि EOW की ओर के द्वारा भी इस मामले में लखमा को गिरफ्तार किया जा सकता है। इसे देखते हुए लखमा के वकील ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगाया गया है। कल होगी पेशी 14 दिन की न्यायिक रिमांड जेल में बंद कवासी लखमा की 4 फरवरी को न्यायिक रिमांड खत्म हो रही है। रिमांड अवधि खत्म होने के बाद उन्हें मंगलवार यानी कल ED के स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस दौरान ED की ओर से फिर से पूर्व आबकारी मंत्री की न्यायिक रिमांड बढ़ाने की मांग की जा सकती है। ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी।वही शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। वही ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। कमिशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण भी ED का आरोप है कि3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे। ईडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। घोटाले की रकम 2100 करोड़ से ज्यादा लखमा के खिलाफ एक्शन को लेकर निदेशालय की ओर से कहा गया कि जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले की रकम 2100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। 2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में ED के मुताबिक ऐसे होती थी अवैध कमाई।


