छात्र हर परिस्थिति में खुद को संतुलित रखें, माता पिता भी घबराएं नहीं, बच्चों को सहयोग दें : संजय

भास्कर न्यूज | गिरिडीह बीते रविवार को हुई नीट परीक्षा में देशभर से करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए। परीक्षा के बाद अधिकतर छात्रों के चेहरे पर मायूसी दिखी। इसका कारण था पेपर का कठिन स्तर और प्रश्न पूछने का तरीका। गोल धनबाद के केंद्र निदेशक संजय आनंद ने छात्रों के करियर के हित में परीक्षा का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि छात्र हर परिस्थिति में खुद को संतुलित रखें। माता-पिता भी घबराएं नहीं, बच्चों को सहयोग दें। इस बार फिजिक्स से अब तक का सबसे कठिन प्रश्न पूछा गया। बायोलॉजी में स्टेटमेंट बेस्ड और एसरशन-रीजन वाले प्रश्न अधिक थे। तीन प्रश्नों को एनसीईआरटी से बाहर का बताया जा रहा है। बॉटनी से 58 और जूलॉजी से 32 प्रश्न आए। बॉटनी में कॉलम मैचिंग के 11 और स्टेटमेंट बेस्ड 21 प्रश्न थे। कक्षा 11 से 40 और 12 से 50 प्रश्न पूछे गए। रसायन भी आसान नहीं था, लेकिन सामान्य रहा। बायो और केमिस्ट्री के प्रैक्टिकल भाग से भी प्रश्न पूछे गए। फिजिक्स के कुछ प्रश्न इतने जटिल थे कि छात्र ऊपर का पैराग्राफ पढ़ते-पढ़ते भूल जा रहे थे। कुछ प्रश्न जेई मेन के स्तर से भी कठिन थे। पिछले 5 वर्षों के जेई मेन पेपर से 11 प्रश्न पूछे गए। जेई मेन में 75 प्रश्नों के लिए 3 घंटे मिलते हैं, यानी फिजिक्स के 25 प्रश्नों के लिए एक घंटा। नीट में 180 प्रश्नों के लिए 3 घंटे, यानी 45 प्रश्नों के लिए एक घंटा। कोविड के बाद से छात्र आसान प्रश्नों के अभ्यस्त हो गए थे। छात्रों पर दबाव कम करने के लिए 98 चैप्टर घटाकर 78 कर दिए गए थे। संजय आनंद ने कहा कि सही मार्गदर्शन में तैयारी करने वाले छात्र जानते हैं कि किस विषय से समय बचाकर उसका सदुपयोग कैसे करना है। छात्रों को यह भी समझना होगा कि वे दूसरों से अलग कैसे बनें। आत्मविश्वास के साथ कट-ऑफ पार करने या रैंक लाने के लिए जरूरी कार्यों को सावधानी से अंतिम रूप दें। प्रश्न कठिन हो या आसान, घबराएं नहीं। कठिन प्रश्नों पर कट-ऑफ कम और आसान प्रश्नों पर कट-ऑफ अधिक होता है। इस बार राष्ट्रीय स्तर पर कट-ऑफ 550 और झारखंड में 520 के आसपास रहने की संभावना है। लगभग 55 हजार सरकारी सीटें हैं और इस बार भी सभी सीटें भर जाएंगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *