छिंदवाड़ा: दो मरीजों की मौत के बाद बड़ा एक्शन:6 स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई, वेतनवृद्धि रोकने का प्रस्ताव, 2 की सैलरी काटी

छिंदवाड़ा जिला चिकित्सालय में 11 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान मेडिकल वार्ड में भर्ती दो मरीजों की मौत के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। जांच में लापरवाही सामने आने के बाद कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ सहित कुल 6 स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। मृतकों में चैतू धुर्वे और इंद्रा बाई (पति सूरजलाल) शामिल हैं। दोनों मरीज इलाज के लिए मेडिकल वार्ड में भर्ती थे। आरोप था कि हालत बिगड़ने के बावजूद उन्हें समय पर विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल पाया। इसके बाद मामले की जांच कराई गई। वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने की जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक द्वारा वरिष्ठ डॉक्टरों की जांच समिति बनाई गई। टीम ने ड्यूटी रोस्टर, ऑन-कॉल व्यवस्था, नर्सिंग स्टाफ की भूमिका, ICU और इमरजेंसी की कार्यप्रणाली की जांच की। 13 जनवरी को जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि रात और आपातकालीन समय में ड्यूटी व्यवस्था कमजोर थी। ऑन-कॉल डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं हो पाए और SOP का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। ICU, इमरजेंसी और वार्ड के बीच समन्वय की भी कमी पाई गई। डॉक्टरों और नर्सों पर की कार्रवाई जांच में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एम.पी. यादव को लापरवाह पाया गया। उनके खिलाफ एक वेतनवृद्धि रोकने का प्रस्ताव बनाकर जबलपुर संभाग आयुक्त को भेजा गया है। रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. योगेन्द्र राहंगडाले पर भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने का आरोप साबित हुआ। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मेडिकल कॉलेज रतलाम को पत्र भेजा गया है। नर्सिंग ऑफिसर दुर्गा नागवंशी और अर्चना डहेरिया द्वारा समय पर डॉक्टरों को सूचना नहीं देने की लापरवाही सामने आई। दोनों की एक-एक वेतनवृद्धि रोकी गई है। दो डॉक्टरों की सैलरी काटी डॉ. पंकज मिश्रा रात्रि ड्यूटी के दौरान वार्ड में मौजूद नहीं मिले, जबकि डॉ. फहीम खान ने मरीज की गंभीर हालत के अनुसार निगरानी नहीं की। दोनों के खिलाफ 15-15 दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए हैं। अस्पताल व्यवस्था सुधारने के निर्देश कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि रात और आपातकालीन ड्यूटी व्यवस्था मजबूत की जाए, ऑन-कॉल सिस्टम का सख्ती से पालन हो और SOP हर हाल में लागू किया जाए। साथ ही ICU, इमरजेंसी और वार्ड के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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