इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद छिंदवाड़ा नगर निगम की नींद टूटी है। शहर की जलप्रदाय व्यवस्था की पड़ताल में चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। शहर के सबसे घनी आबादी वाले रामबाग और लालबाग इलाकों में पीने के पानी की लाइनें खुली नालियों और गटर के बीच से गुजर रही हैं। गंदगी और साफ पानी के बीच का यह खतरनाक फासला कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। प्रशासन ने अब आनन-फानन में सर्वे और सुधार कार्य शुरू कर दिया है। पीजी कॉलेज रोड पर आईएचएसडीपी योजना के तहत बनी सरकारी मल्टी में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां करीब 200 परिवार रहते हैं। पीने के पानी की लाइनें ऐसी जगह से निकाली गई हैं, जहां सीवरेज और कचरे का ढेर है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सीवरेज लाइनें कई जगह से फूट चुकी हैं, जिससे गंदा पानी सप्लाई पाइपों में मिलने का खतरा बना हुआ है। पुलिस लाइन की टंकी खुली मिली, आज से सफाई अभियान
शहर की कई पानी की टंकियों की सालों से सफाई नहीं हुई है। जांच में सामने आया कि पुलिस लाइन क्षेत्र की टंकी की छत ही खुली पड़ी थी। शासन की सख्ती के बाद निगम ने रविवार से शहर की सभी टंकियों की सफाई के आदेश जारी कर दिए हैं। निगम हरकत में, रामबाग में लीकेज सुधारे
इंदौर हादसे के बाद शनिवार को निगम का अमला हरकत में दिखा। रामबाग क्षेत्र में विशेष सर्वे कर लीकेज पॉइंट्स चिह्नित किए गए। आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर तुरंत पाइपलाइन सुधारी गई। गंदे पानी की शिकायतें बढ़ने से निगम के फोन घनघनाते रहे। कमिश्नर बोले- 48 वार्डों में सर्वे शुरू
नगर निगम आयुक्त चंद्रप्रकाश राय ने बताया कि पूरे शहर में सर्वे शुरू कर दिया गया है।


