छिंदवाड़ा में एक और बच्चे की भी मौत… अब-आंकड़ा 7:कफ सिरप में ब्रेक ऑयल का सॉल्वेंट डाल रहे, वजह-सस्ता है

कफ सिरप पीने के बाद किडनी फेल होने से छिंदवाड़ा के एक और बच्चे की मौत हो गई। गुरुवार को नागपुर में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ा। अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। छिंदवाड़ा में 7 बच्चों की किडनी फेल के बाद मौत को कफ सिरप से जोड़कर देखा जा रहा है। जिस कफ सिरप के सैंपल लिए गए हैं, उसमें डायएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) मिला है। इसी तरह के सिरप से इंडोनेशिया, अफ्रीकी देश गाम्बिया में पहले भी मौतें हो चुकी हैं। इंडोनेशिया में 15 नवंबर 2022 में डीईजी से दूषित खांसी का सिरप पीने से 150 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। गाम्बिया में भी 66 की जान गई थी। यह रसायन दवा में मिलाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि बच्चों की जान के लिए सीधा खतरा है। डीईजी से दूषित सिरप लेने वाले बच्चों में शुरुआती लक्षण उल्टी, दस्त और पेट दर्द होते हैं। दो-तीन दिन में ही पेशाब आना बंद हो जाता है। किडनी फेल होने लगती है। इसके बाद सांस लेने में तकलीफ, शरीर में सूजन और लकवे जैसे लक्षण सामने आते हैं। यही कारण है कि छिंदवाड़ा के मामलों में बच्चों की हालत अचानक बिगड़ गई और मौत हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि 6 साल से छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी का सिरप कभी नहीं देनी चाहिए। दवा हमेशा लाइसेंस प्राप्त फॉर्मेसी से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत अस्पताल पहुंचे। यह सिरप को पतला-मीठा करता है, यह गैरकानूनी क्या है डायएथिलीन ग्लाइकोल?
डीईजी एक औद्योगिक सॉल्वेंट है। इसका उपयोग पेंट, वार्निश, ब्रेक फ्लुइड और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स में किया जाता है। जब यह शरीर में जाता है, तो डाइग्लाइकोलिक एसिड (डीजीए) में बदलकर किडनी और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। बच्चों में यह जहर की तरह असर करता है और किडनी फेल होने तक की स्थिति ला सकता है।
इतना जानलेवा है तो सिरप में मिलाते क्यों हैं?
डीईजी सिरप को पतला करता है। इसमें मीठापन व ठंडक होती है, जिससे बच्चे दवा आसानी से पी लेते हैं। यह ग्लिसरीन या प्रोपाइलीन ग्लाइकोल से बेहद सस्ता है, इसलिए कंपनियां सिरप की मात्रा बढ़ाने व लागत घटाने के लिए इसका उपयोग करती हैं, जबकि दवाओं में डीईजी का इस्तेमाल कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।
इसका इलाज क्या है?
यदि किसी ने डीईजी का इस्तेमाल कर लिया है तो मरीजों के लिए सबसे कारगर इलाज फोमेपिजोल है। यह दवा शरीर में मौजूद अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज एंजाइम की क्रिया को रोकती है, जिससे जहरीले मेटाबोलाइट्स नहीं बन पाते। इसके साथ ही मरीजों को डायलिसिस, आईवी फ्लूड्स और वेंटिलेटर सपोर्ट जैसी चिकित्सीय सहायता भी दी जाती है।
वैश्विक स्तर पर चिंता क्यों?
इससे पहले जब इस तरह के सिरप से मौतें हुईं तो भारतीय एजेंसियों ने पाया कि कई कंपनियों ने गुणवत्ता जांच नहीं की। कच्चे माल का रिकॉर्ड नहीं रखा। भारत को ‘फॉर्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में दवाएं विदेशों को सप्लाई होती हैं। लेकिन भारत का नाम अब तक डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की ग्लोबल रेग्युलेटरी स्टैंडर्डस लिस्ट में नहीं है। यानी निगरानी प्रणाली को लेकर भारत को डब्ल्यूएचओ से पूरी मान्यता नहीं। राजस्थान में सिरप से 1 और बच्चे की मौत… भरतपुर के वैर में खांसी का सिरप पीने से दो साल के तीर्थराज की मौत हो गई। सीकर में एक मौत पहले हो चुकी है। इसके बाद सिरप की बिक्री पर बैन लगा दिया गया है।

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