मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे किए जाते हैं, लेकिन ऊर्जा विभाग का ताजा मामला इसकी पोल खोलता है। विद्युत सुरक्षा कार्यालय के तत्कालीन चीफ इंजीनियर अरुण श्रीवास्तव 30 जून को रिटायर हुए। इस पद को ढाई महीने तक खाली रखा गया ताकि श्रीवास्तव को एक्सटेंशन या संविदा नियुक्ति दी जा सके। यह प्रस्ताव सीएम समन्वय और विभागीय समिति तक भी पहुंचा, लेकिन दोनों जगह से खारिज कर दिया गया।
बाद में रीवा के एसई एपीएस जादौन को प्रभार दिया गया, जिन पर भी 2021 में रिश्वत लेते पकड़े जाने का आरोप है, हालांकि चार्जशीट अब तक दाखिल नहीं हुई। श्रीवास्तव के खिलाफ पश्चिम क्षेत्र विद्युत कॉन्ट्रैक्टर्स एवं इंजीनियर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 6-7 महीनों तक शिकायतें की थीं। उन पर हर माह करीब ढाई करोड़ रुपये रिश्वत वसूलने का आरोप है। सीएम मॉनिट से ऊर्जा विभाग को जांच के लिए भी कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। रिटायरमेंट के दिन श्रीवास्तव ने लगभग 25 ट्रांसफर कर दिए, जबकि उस समय ट्रांसफर-पोस्टिंग पर रोक लगी थी। कुछ अधिकारी कोर्ट भी गए। श्रीवास्तव का कहना है कि पुराने अधिकारियों ने उन्हें हटवाने के लिए झूठी शिकायतें की हैं और ट्रांसफर विभागीय स्तर पर हुए। सीधी बात – प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री मंत्रीजी का हर सवाल पर अस्पष्ट जवाब, बोले- बाद में बात करेंगे श्रीवास्तव की तमाम शिकायतों के बाद भी एक्सटेंशन और संविदा नियुक्ति का प्रस्ताव क्यों भेजा गया?
जवाब – मंत्री होने के नाते मेरे सामने चुनिंदा मामले में फाइलें आती हैं, जो शासन को भेजनी होती हैं। आरोप लग रहे हैं कि प्रस्ताव को आपका समर्थन था?
जवाब – ऐसा नहीं है। किसी का तो सपोर्ट होगा। अपने आप तो प्रस्ताव जा नहीं सकता?
जवाब- हां ये तो सही है। किसी अधिकारी के लिए खुद अपना प्रस्ताव शासन को भेजना संभव नहीं है जिनको चार्ज दिया गया है, उनके ऊपर भी आरोप हैं?
जवाब – आपने ये विषय मेरे संज्ञान में लाया है। मैं अभी ग्वालियर हूं। भोपाल आकर इस मुद्दे पर बात करूंगा। रिटायरमेंट से पहले इतने चार्ज थे श्रीवास्तव के पास
मुख्यालय में प्रभारी चीफ इंजीनियर, एसई उज्जैन सर्किल, इंदौर सर्किल, भोपाल सर्किल। ईई नर्मदापुरम, ईई भोपाल संभाग, ईई भोपाल मुख्यालय और लाइसेंसिंग बोर्ड के अध्यक्ष एवं अन्य प्रभार। हमने राष्ट्रपति तक को शिकायतें भेजीं
^हमने एसीएस, ऊर्जा मंत्री, सीएम और राष्ट्रपति तक को शिकायतें भेजीं, पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी के रिटायर होने के बाद भी शिकायतों पर संज्ञान लेकर कार्रवाई होनी चाहिए। इन्होंने जान-बूझकर 11 कार्यालयों का प्रभार खुद के पास रखा था।
इंजी. शैलेंद्र अग्रवाल, महासचिव-पश्चिम क्षेत्र विद्युत कॉन्ट्रैक्टर्स एवं इंजीनियर्स वेलफेयर एसोसिएशन


