छेहर्टा में 11 साल से प्रॉपर्टी टैक्स न देने पर सील की दुकान, मालिक ने 15 मिनट में सीलिंग तोड़ खोली

शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर नगर निगम की अवैध निर्माण करने वालों और प्रॉपर्टी टैक्स न देने वालों के खिलाफ की जा रही सीलिंग की कार्रवाई खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं। टीमों के सीलिंग करने के मात्र 15 मिनट में ही संबंधित लोग सीलिंग तोड़कर काम शुरू कर दे रहे हैं। एमटीपी विभाग ने श्री दरबार साहिब के पास बाग रामानंद में करीब 7 दिन पहले अवैध बिल्डिंग को सील किया था। लेकिन वहां अगले दिन ही निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया था। अब छेहर्टा के खंडवाला में 11 साल से प्रॉपर्टी टैक्स जमा न कराने पर एक दुकान सील की। मगर दुकान के मालिक ने महज 15 मिनट बाद ही सील तोड़कर दुकान खोल डाली। मगर दोनों मामलों में एमटीपी और एस्टेट विभाग की टीमों की ओर से सीलिंग तोड़ने वालों के खिलाफ केस दर्ज करवाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हैरानी की बात है कि एक तरफ निगम कमिश्नर गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे रहे हैं तो दूसरी तरफ सीलिंग तोड़ने वालों पर कार्रवाई करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहीं। तुरंत एक्शन लेने की जगह अफसर खानापूर्ति तक सिमट रहे हैं। बता दें कि बीते 9 जनवरी को सेंट्रल विधानसभा हलका में 19 अवैध बिल्डिंग-होटलों के खिलाफ एमटीपी विभाग ने कार्रवाई की थी। इसके अगले दिन 10 और अवैध बिल्डिंग सील की गई। लेकिन उसी दिन एक वीडियो सामने आया जिसमें बाग रामानंद गली-9 में सील बिल्डिंग में फिर से निर्माण काम शुरू करा दिया गया। इसी तरह 15 जनवरी को खंडवाला में प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं कराए जाने पर दुकान सील की । मगर दुकान संचालकों ने निगम को ठेंगा दिखाते हुए सीलिंग तोड़ डाली। अवैध बिल्डिंग को सील करने के बाद दोबारा से काम शुरू कराने के मामले में एमटीपी विभाग के अफसरों से संपर्क किया गया लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। वहीं इलाके के बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पास भी कोई जवाब नहीं था। एडवोकेट पीसी शर्मा का कहना है कि विभागीय अधिकारी निगम के आला अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। मामला जानबूझकर कागजी कार्रवाई में अटका​ दिया जाता है ताकि संबंधित पर केस दर्ज न हो सके। ^ खंडवाला में जिस दुकान की सीलिंग तोड़ी गई थी, उसकी रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई के लिए सुपरिंटेंडेंट को लिखकर भेज दी है। आला अफसरों के आदेश पर बनती कार्रवाई की जाएगी। -रविंदर सिंह, प्रॉपर्टी टैक्स इंस्पेक्टर

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