भास्कर न्यूज | राउरकेला हर साल की तरह इस बार भी धान खरीद टोकन मिलने से पहले ही दलाल सक्रिय हो गए हैं। झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों से दलाल किसानों के नाम पर धान खरीदकर अपने गोदामों में जमा कर रहे हैं। कुछ मामलों में इसे चावल मिलों में भी रखा गया है। ओड़िशा-झारखंड सीमा से लगे ब्लॉकों के अधीन एलएएमपीएस में 20 दिसंबर के बाद मंडी खोलने की तैयारी है। पंजीकृत किसानों को अगले 3–4 दिनों में धान बेचने के लिए टोकन मिलेगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसान सही तरीके से टोकन प्राप्त कर अपने धान को मंडी में बेच सकें, लेखा एवं निगरानी मंत्री द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। हालांकि, सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद दलाल सक्रिय हैं। झारखंड के हुर्रा, मनोहरपुर, ओडगांव, पानीयासाल और बांसाझोर जैसे सीमावर्ती बाजारों और गांवों के आदिवासी किसानों को लालच देकर दलाल 2000–2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रहे हैं। पकड़ से बचने के लिए ट्रकों की बजाय पिक-अप वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। धान मुख्य सड़कों से बचकर गलियों और वैकल्पिक रास्तों से बिश्रा, नुआगांव, हाथीबाड़ी, सोरडा, बड़ा जोजोड़ा, खुण्टगांव, बारिबेड़ा, कुआरमुंडा आदि क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। नुआगांव, कुआरमुंडा, बिश्रा और लाठीकाटा जैसे ब्लॉकों में किसानों को एक टोकन पर 10–50 क्विंटल तक धान बेचने की अनुमति होती है। यह बात दलाल अच्छी तरह जानते हैं। कई किसानों के पास 20–30 क्विंटल धान है, और उन्हें टोकन मिलेगा। दलाल इन्हें निशाना बनाकर प्रति क्विंटल ₹200–300 का कमीशन देने का लालच देकर झारखंड का धान अपने नाम पर बेच रहे हैं। इस बार भी ओडिशा और झारखंड के दलाल मिलकर पिछले वर्ष जैसा ही तरीका अपना रहे हैं। चार ब्लॉकों में जिन किसानों के पास कम धान है, उनकी सूची तैयार कर उन्हें अग्रिम राशि भी दे दी गई है। मालवाहक से ही परिवहन िमल व गोदाम पहुंचा रहे झारखंड की सीमाक्षेत्रों से अवैध धान का परिवहन टाटा एसीई गाड़ियों से किया जा रहा है। इसके कारण आपूर्ति विभाग के लिए पहचान करना कठिन हो रहा है। देर रात और सुबह के समय सैकड़ों क्विंटल धान सीधे चावल मिलों और दलालों के गोदामों में पहुँचाया जा रहा है। पिछले वर्ष ओडिशा में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल था। इस बार सरकार इसे ₹3,169 प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी। दलाल झारखंड के किसानों से ₹2,000 में धान खरीदकर ओडिशा मंडी में बेचकर प्रति क्विंटल लगभग ₹1,000 का लाभ कमाने की योजना बना रहे हैं।


