​​​​​​​जंगी ऐप पर था खालिस्तानी शूटर्स का कनाडा कनेक्शन:सुपारी, हत्या के बाद कैसे भागना है, इसी पर मिले आदेश; डेटा रिकॉर्ड नहीं होता

ग्वालियर के डबरा में हुई जसवंत गिल की हत्या की पूरी स्क्रिप्ट जंगी ऐप (ZANGI APP) पर लिखी गई थी। इसी ऐप पर खालिस्तानी शूटर्स को उनके आका प्रिंस से सुपारी से लेकर हत्या और इसके बाद कैसे भागना है, इसके
पूरे निर्देश मिले थे। इस ऐप पर आप वॉट्सऐप की तरह ही चैट, वीडियो और वॉयस कॉल कर सकते हैं। फर्क इतना है कि इसके रजिस्ट्रेशन के लिए फोन नंबर की जरूरत नहीं है। लॉग इन करते समय यूजर नेम और पासवर्ड क्रिएट करना होता है। इसके बाद ऐप पर एक आईडी मिल जाती है। इसकी एक और खासियत ये है कि 10 मिनट बाद डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। 20 मिनट बाद डिलीट डाटा सर्वर से भी वॉशआउट हो जाता है। क्या मैसेज हुए, इसका कोई रिकॉर्ड किसी के पास नहीं होता। इसका सर्वर भी कनाडा में है। अब जसवंत गिल हत्याकांड की जांच में लगी एजेंसियां इस डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं। कुछ समय पहले बिश्नोई गैंग के भी इसी ऐप का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। डंकी रूट से कनाडा बुलाने का था प्लान
पकड़े गए दोनों शूटर्स अनमोलप्रीत सिंह औन नवजोत सिंह उर्फ नीटू ने खुलासा किया है कि हत्या के बाद 5 लाख रुपए मिलने थे। प्रिंस ने वादा किया था कि वह उन्हें डंकी रूट के जरिए कनाडा बुलवा लेगा। जानिए क्या होता है डंकी रूट?
डंकी रूट अवैध रूप से एक देश से दूसरे देश जाने के रास्ते को कहते हैं। इस रास्ते से अमेरिका, कनाडा और कुछ यूरोपीय देशों में पहुंचा जाता है। डंकी रूट का मतलब है, विदेश जाने का बैक डोर रास्ता। हर साल हजारों-की संख्या में लोग विदेश जाने के लिए ‘डंकी रूट’ का अवैध तरीका अपनाते हैं। इसे कबूतरबाजी भी कहते हैं। एनआईए ने भी की है पूछताछ
इस मर्डर केस में खालिस्तानी और कनाडा का एंगल सामने आने के बाद एनआईए (नेशनल जांच एजेंसी) के अधिकारी भी ग्वालियर आ चुके हैं। उन्होंने शूटर्स से पूरे मामले में पूछताछ की है। यही कारण है कि यह हाई
प्रोफाइल मामला हो गया है। क्या था पूरा मामला?
घटना 7 नवंबर की रात की है। ग्वालियर के डबरा में जसवंत गिल उर्फ सोनी सरदार की हत्या हुई थी। पंजाब से आए शूटर्स अनमोलप्रीत सिंह और नवजोत सिंह उर्फ नीटू ने गोलियां मारी थीं। जसवंत भी हत्या के केस में सजायाफ्ता बंदी था। शूटर्स खालिस्तनी आतंकी अर्श डल्ला के साथी हैं। डल्ला कनाडा में ही रहता है। सतपाल ने भाई का बदला लेने दी थी सुपारी
ग्वालियर पुलिस के इनपुट के बाद पंजाब पुलिस ने मोहाली के पास से दोनों शूटर्स को शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार किया था। 25 दिसंबर से दोनों शूटर ग्वालियर की डबरा पुलिस के सुपुर्द हैं। पूछताछ में शूटर्स से पता चला कि इनके बॉस प्रिंस को कनाडा के रहने वाले सतपाल सिंह ने 5 लाख रुपए की सुपारी दी थी। उसे 8 साल पहले हुई अपने छोटे भाई की हत्या का बदला लेना था। मर्डर से 15 दिन पहले जंगी ऐप पर बातचीत
शूटर्स से पता चला है कि जसवंत की हत्या से 15 दिन पहले जंगी ऐप पर उनकी बॉस प्रिंस से बातचीत शुरू हुई थी। उन्हें कुछ भी चाहिए होता था, तो वे इसी ऐप पर शेयर करते थे। रिटर्न में उनको अपडेट मिलता था कि संबंधित चीज उनको कहां, कब और कैसे मिलेगी। पुलिस को शक प्रिंस ही अर्श डल्ला है
पंजाब से दोनों शूटर पहले आगरा आए थे। यहां से बस पकड़कर ग्वालियर और इसके बाद टेकनपुर पहुंचे। यहां एक होटल में उनके रहने की पहले से ही व्यवस्था थी। हत्या को अंजाम देने की पूरी प्लानिंग इसी ऐप पर मिली थी। हत्या करने के बाद कैब के नंबर तक इसी ऐप पर मिले। पुलिस को आशंका है कि जंगी ऐप पर शूटर्स को जो प्रिंस बनकर निर्देश दे रहा था, असल में वो खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला ही है। हत्याकांड के तीन दिन बाद अर्श डल्ला को कनाडा पुलिस ने ने पकड़ा था। सतपाल को कनाडा से लाने की तैयारी
एएसपी देहात निरंजन शर्मा ने बताया कि पुलिस ने सतपाल की भूमिका पर उसको कनाडा से लाने की तैयारी पूरी कर ली है। जसवंत हत्याकांड में सतपाल का कनेक्शन फंडिंग के जरिए साबित हो गया है। अब उसे भारत लाने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क कर कनाडा दूतावास पर सतपाल की गिरफ्तारी के लिए बातचीत शुरू की जाएगी। 8 साल पहले का वो हत्याकांड, जिसमें जसवंत सजायाफ्ता था
जसवंत (मृतक) की पत्नी के मामा राजविंदर सिंह आठ साल पहले 2016 में अपने परिवार के साथ ग्वालियर के आदित्यपुरम में रहते थे। उनका बड़ा बेटा सतपाल सिंह कनाडा में सेटल था। छोटा बेटा सुखविंदर, पत्नी बलविंदर
कौर और 13 साल की बेटी हरमन कौर उन्हीं के साथ रहती थी। 5 फरवरी 2016 को जसवंत सिंह एक शादी में शामिल होने ग्वालियर आया था। रात ज्यादा होने पर वह अपने घर जाने के बजाय मामा ससुर राजविंदर के घर रुक गया था। आधी रात को जसवंत ने सुखविंदर की गोली मारकर हत्या कर दी। इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। सुबह उसने ससुर राजविंदर और सास बलविंदर को भी गोली मारी और फरार हो गया। पड़ोसी दोनों को घायल हालत में अस्पताल लेकर गए, जहां दोनों की जान बच गई, लेकिन सुखविंदर की मौत हो गई थी। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- परिवार बोला- मामा ससुर धमकी देता था ‘वो साल में तीन बार 15-15 दिन के लिए पैरोल पर आते थे। 14 साल की सजा में से उनके 8 साल पूरे हो चुके थे। कुछ ही साल बाकी थे, फिर वे हमारे साथ रहने घर पर आ जाते। जो गुनाह उन्होंने किया, उसकी सजा काट रहे थे। इसके बाद भी मेरे मामा ने उनकी हत्या करवा दी।’ ये कहते हुए जसवंत सिंह सरदार की पत्नी रजविंदर कौर की आंखें नम हो जाती हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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