पंजाब के लुधियाना जिले की जगराओं में भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा की ब्लॉक स्तरीय बैठक हुई, जिसमें पराली जलाने संबंधी नोटिसों के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की गई। यह बैठक ब्लॉक अध्यक्ष तरसेम सिंह बसुवाल की अध्यक्षता में गांव देहड़का में आयोजित की गई। इस दौरान जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहड़का भी उपस्थित रहे। बैठक में लुधियाना सेशन कोर्ट द्वारा एक किसान नेता और मजदूर परिवार को तीन साल की सजा सुनाए जाने की कड़ी निंदा की गई। यह सजा एक मजदूर का घर साहूकार से बचाने के प्रयास में सुनाई गई थी। किसान नेताओं ने इस फैसले को ‘सच्चाई को फांसी पर लटकाना’ बताया। किसानों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए घर-घर से रेह और गेहूं का बीज इकट्ठा करने का निर्णय लिया। बाढ़ प्रभावित लोगों को मिले मुआवजा उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को 70 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा, ढहे घरों का पुनर्निर्माण और प्रति एकड़ की शर्त को हटाने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि कुप्रबंधन का परिणाम है। उन्होंने धान की फसल में रोग और रंग खराब होने के कारण किसानों को पूरा बाजार भाव और उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की निंदा सुप्रीम कोर्ट द्वारा पराली जलाने पर किसानों को जेल भेजने के आदेश को निंदनीय बताया गया। किसानों ने मांग की कि ग्रीन ट्रिब्यूनल की सिफारिशों के अनुसार पराली प्रबंधन पर प्रति क्विंटल या प्रति एकड़ राहत दी जाए, क्योंकि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई मशीनरी अपर्याप्त और अनुपयोगी है। बैठक में पिछले साल पराली जलाने वाले छोटे किसानों को फिर से नोटिस भेजने की भी आलोचना की गई। किसान नेताओं ने घोषणा की कि इन नोटिसों के खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने जगराओं क्षेत्र के प्रभावित किसानों से मंगलवार सुबह 11 बजे एसडीएम कार्यालय जगराओं के सामने एकत्र होने की अपील की, ताकि नोटिस रद्द करवाए जा सकें। इस बैठक में रछपाल सिंह डल्ला, बेअंत सिंह, लखमेर सिंह, सरबजीत सिंह खैहरा, अमरजीत सिंह और ध्यान सिंह सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।


