लुधियाना में जगराओं शहर में गंदगी के बढ़ते ढेरों को लेकर नगर कौंसिल के ईओ सुखदेव रंधावा की ओर से आपात बैठक बुलाई गई। करीब दो घंटे की बैठक में शोर-शराबा तो खूब हुआ, लेकिन कोई समाधान नहीं। गुरुवार को विपक्षी पार्षदों ने ईओ से मिलकर ज्ञापन सौंपा था। चेतावनी दी थी कि दो दिन में सफाई का हल नहीं निकला तो नगर कौंसिल कार्यालय के सामने धरना देंगे। शुक्रवार को हुई बैठक में भी कोई हल नहीं निकला। नगर कौंसिल के पास कूड़ा संभालने के लिए कोई बड़ा डंप नहीं है। शहर के चारों ओर जहां जगह मिलती है, वहीं कूड़े के पहाड़ बना दिए जाते हैं। रायकोट रोड, साइंस कॉलेज के पास, कोठे पोना के रास्ते, छप्पड़ के पास, डिस्पोजल रोड पर कूड़े के ढेर लगे हैं। उनसे उठती बदबू और गर्मी में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। कब्जे वाली जमीन पर उठाए सवाल बैठक में पार्षदों ने नगर कौंसिल की अवैध कब्जे वाली जमीन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशा तस्कर का घर एक मिनट में गिराने वाली कौंसिल अपनी जमीन खाली क्यों नहीं करवा सकती। प्रधान राणा ने बताया कि पुरानी सब्जी मंडी रोड पर कई एकड़ सरकारी जमीन है। वहां कूडा फेंका जाए। लेकिन विपक्षी पार्षद व पार्षद पतियों ने हंगामा करते कहा कि पहले कौंसिल अपना कब्जा दिखाए। गुटबाजी के चलते कूड़े पर राजनीति बैठक के अंत में ईओ सुखदेव सिंह रंधावा ने कहा कि उन्होंने शहर की सबसे बड़ी समस्या को लेकर बैठक बुलाई थी ताकि सभी पार्षद मिलकर हल निकाल सकें। लेकिन जो कुछ बैठक में हुआ, उससे साफ हो गया कि गुटबाजी के चलते कूड़े पर राजनीति हो रही है। महिला पार्षद रही गैरहाजिर नगर कौंसिल की ओर से शहर में बढ़ती कूड़े की समस्या को लेकर बैठक बुलाई गई। बैठक में महिला पार्षदों की गैरहाजिरी ने सभी को चौंका दिया। कई वार्डों की महिला पार्षद खुद नहीं आईं। उनकी जगह किसी का पति तो किसी का बेटा बैठक में पहुंचा। महिला पार्षदों की उदासीनता
कौंसिल अधिकारी ने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए यह बैठक बुलाई थी। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। लोग परेशान हैं। इसके बावजूद महिला पार्षदों की उदासीनता सामने आई। बैठक के बाद लोगों ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि ही गंभीर नहीं हैं, तो शहर की सफाई व्यवस्था कैसे सुधरेगी। जिन पार्षदों के पास शहर की समस्याओं के लिए समय नहीं, उनसे विकास की उम्मीद करना मुश्किल है।


