जगराओं में दुकानदारों से वसूली लाखों की रिश्वत:कौंसिल अधिकारियों ने भेजा फर्जी नोटिस, फिर छूट देने का दिया झांसा

लुधियाना जिले की जगराओं नगर कौंसिल में प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए घोटाले का मामला सामने आया है। कौंसिल अध्यक्ष जतिंदरपाल राणा के भाई और पार्षद रविंदरपाल राजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका खुलासा किया। पार्षद के अनुसार कौंसिल का इंस्पेक्टर दुकानदारों को फर्जी टैक्स नोटिस भेजता था। फिर टैक्स में छूट देने के नाम पर रिश्वत की मांग करता था। दुकानदार ने कार बेचकर दी रकम एक प्रमुख मामले में दुकानदार गुरप्रीत सिंह को 25 लाख रुपए का नोटिस भेजा गया। उससे 9 लाख रुपए की रिश्वत ली गई, जो उसने अपनी कार बेचकर दी। बदले में उसे मात्र 2 लाख 22 हजार रुपए की रसीदें दी गई। ढोलन गांव के दविंदर सिंह की दुकान पर 2,700 रुपए का टैक्स था, लेकिन उसे 1.80 लाख रुपए का नोटिस भेजा गया। अधिकारी ने 40 हजार रुपए में मामला निपटाने की बात कही। पीड़ित ने बेची पत्नी की बालियां दविंदर ने अपनी पत्नी की बालियां बेचकर और बेटे से पैसे लेकर 15 हजार रुपए रिश्वत दी। पुरानी अनाज मंडी के दुकानदार दीपक कुमार से नक्शा पास करवाने के नाम पर 60 हजार रुपए की रिश्वत ली गई। पार्षद राजू ने कई पीड़ित दुकानदारों को उनकी रिश्वत की रकम वापस दिलवाई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आधा दर्जन पीड़ित दुकानदार भी मौजूद थे। टैक्स हजारों में, लाखों के भेजे नोटिस बलजिंदर सिंह को 2 लाख 37 हजार रुपए का नोटिस भेजा गया, जबकि उनका असली टैक्स 37 हजार था। दीना नाथ को 1 लाख 87 हजार का नोटिस मिला, जबकि उनका टैक्स सिर्फ 2700 रुपए था। राजू ने कहा कि यह सिर्फ कुछ मामले हैं। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होंगे। उन्होंने बताया कि उनकी टीम पिछले 4 साल से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही है, लेकिन नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार का गठजोड़ है। इसी कारण दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। शेष रकम दो दिन में लौटाने का वादा राजू ने बताया कि इंस्पेक्टर ने खुद माना है कि वह अकेला नहीं है। इस खेल में कई अधिकारी और भी शामिल है, गुरप्रीत सिंह से ली गई 5 लाख 30 हजार रुपए की रिश्वत वापस मिल गई है। शेष रकम दो दिन में लौटाने का वादा किया गया है। इस मौके पर जतिंदरपाल राणा, रविंदरपाल राजू और दविंदरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि अगर किसी भी नागरिक से नगर कौंसिल के किसी कर्मचारी या अधिकारी ने रिश्वत ली है, तो वह उनकी टीम से संपर्क करे। वे उनका पैसा वापस दिलवाएंगे।

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