जगराओं में ‘जिसका खेत, उसी की रेत’ सरकारी नीति के तहत अपनी जमीन को खेती योग्य बनाने के प्रयास में रेत निकाल रहे कई किसान कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। इन पीड़ित किसानों ने न्याय की मांग करते हुए एसएसपी लुधियाना डॉ. अंकुर गुप्ता को मांग पत्र सौंपने का प्रयास किया। एसएसपी के कार्यालय में न होने के कारण किसानों ने डीएसपी को अपना मांग पत्र सौंपा। किसानों ने बताया कि बाढ़ के कारण कई गांवों में उनकी जमीन रेत से भर गई थी, जिससे खेती करना असंभव हो गया था। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने ‘जिसका खेत, उसी की रेत’ नीति लागू की थी। इस नीति के तहत किसानों को अपनी जमीन से रेत निकालकर बेचने की अनुमति दी गई थी, ताकि वे अपनी भूमि को फिर से खेती योग्य बना सकें। संसाधनों की कमी के कारण, गरीब किसान रेत माफिया के चंगुल में फंस गए। सिधवां बेट थाना क्षेत्र के गांव मद्देपुर में पंजाब के विभिन्न जिलों से आए रेत माफिया के एक गिरोह ने खुद को सूखा प्रभावित किसानों की संघर्ष समिति का नेता बताया। उन्होंने स्थानीय किसानों से ट्रैक्टर, ट्रॉली और मशीनरी किराए पर लेकर रेत खनन शुरू कर दिया। किसानों का आरोप है कि खनन विभाग और सिधवां बेट पुलिस ने समय रहते स्थानीय किसानों को न तो कोई चेतावनी दी और न ही रेत माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई की। इसके विपरीत, अचानक पुलिस और खनन विभाग ने किसानों के औजार व मशीनरी जब्त कर ली। गरीब किसानों के खिलाफ एफआईआर नंबर 283 दर्ज कर उन्हें थाने ले जाया गया, जबकि असली रेत माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आश्वासन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई यह मामला 10 दिसंबर 2025 को जगराओं की एसडीएम के संज्ञान में लाया गया था। इस दौरान मौके पर डीएसपी और सिधवां बेट के एसएचओ भी उपस्थित थे। किसानों ने मांग की कि रेत माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और धोखाधड़ी का शिकार हुए किसानों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं। उसी दिन पुलिस विभाग को भी मांग पत्र सौंपा गया, जिस पर डीएसपी ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। बाद में संपर्क करने पर डीएसपी ने चुनाव के बाद समाधान का भरोसा दिया। चुनाव के बाद जब किसान एसएचओ सिधवां बेट से मिले, तो उन्होंने मामले में कुछ भी करने में असमर्थता जताई। इससे निराश होकर अब किसानों ने रोष मार्च निकालते हुए पुलिस प्रशासन से असली रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल में यूथ विंग नेता रमन सिंह, यूनियन नेता सुरिंदर सिंह, गुरकमल सिंह, रतन सिंह, सुरजीत सिंह समरा, सुखदेव सिंह, कश्मीर सिंह संतोख सिंह संधू साधू सिंह आदि मौजूद रहे।


