जगराओं में सैकड़ों क्विंटल सरकारी गेहूं खराब:काला पड़ा- उठ रही बदबू, वजन बढ़ाने के चक्कर में कराया पानी का छिड़काव

लुधियाना के जगराओं में फूड सप्लाई विभाग के एक कर्मचारी की लापरवाही से सरकार का करोड़ों रुपए का गेहूं खराब हो गया है। नियमित कर्मचारी की अनुपस्थिति में आए नए कर्मचारी ने गेहूं की बोरियों पर अत्यधिक पानी का छिड़काव कर दिया। जिससे पूरा गेहूं काला पड़ गया और बदबूदार हो गया। विभाग के उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी उस समय हुई, जब उन्होंने शेरपुर रोड स्थित प्राइवेट सेलर में स्पेशल ट्रेन में गेहूं लोड करने से पहले जांच की। जांच में पाया गया कि बोरियों में भरा गेहूं खाने योग्य नहीं रहा। सेलर के भीतर गेहूं के ढेरों से बदबू आ रही थी। इससे पहले जगराओं से जोधपुर भेजी गई स्पेशल ट्रेन में पनसप और पनग्रेन एजेंसियों का गेहूं था। जोधपुर में सैंपल फेल होने पर दोनों एजेंसियों पर 9-9 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। इस बार पनसप विभाग ने ट्रेन लोडिंग से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उनका गेहूं उच्च क्वालिटी का है और वे जुर्माने का जोखिम नहीं लेना चाहते। खराब हुआ गेहूं अब राशन डिपो के माध्यम से गरीबों को वितरित किए जाने की तैयारी है। सेलर में रखा था 120 चक्का गेहूं बता दें कि, शेरपुरा रोड स्थित सेलर में करीब 120 चक्के गेहूं (प्रति चक्का 3280 बोरी) रखा गया था। जिसमें 70 से 75 चक्का अभी भी बाकी है। जिसमें काफी ज्यादा गेहूं खराब और काले रंग का है। इस बार भी अधिकारियों ने हमेशा की तरह स्पेशल ट्रेन से एक दिन पहले गेहूं की बोरियों पर पानी का छिड़काव करवाया, ताकि वजन बढ़े और बचा हुआ गेहूं बाजार में बेचा जा सके। मगर नए कर्मचारी ने आदेशों का पालन करते हुए रात के अंधेरे में अंदाजे से इतना ज्यादा पानी डाल गया कि पूरा गेहूं ही सड़ कर काला हो गया और उसमें से बदबू आने लगी। एफसीआई भी सवालों के घेरे में एफसीआई के मैनेजर बलदेव सिंह ने फोन पर की बातचीत में माना कि गेहूं की क्वालिटी घटिया है और विभागों को पत्र लिखकर सुधारने के लिए कहा गया है। जब उनसे पूछा गया कि इतना खराब गेहूं सिर्फ हवा और छानना लगाने से कैसे सही होगा, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। क्वालिटी इंस्पेक्टर ने भी किया इनकार
जानकार बताते हैं कि डीएम क्वालिटी ने दो दिन पहले ही सेलर में जाकर बोरियों की जांच की थी और साफतौर पर कहा था कि ऐसा गेहूं ट्रेन में नहीं भरा जा सकता, क्योंकि उसका रंग काला पड़ चुका है। अब सवाल यह है कि क्या विभाग के उच्च अधिकारी जिम्मेदार इंस्पेक्टर पर कोई कार्रवाई करेंगे या फिर करोड़ों के खराब गेहूं का ये खेल हर बार की तरह गरीबों के हक का अनाज दबाकर रिश्वत के बोझ तले खत्म कर दिया जाएगा। एजेंसी इंस्पेक्टर का बचाव और हकीकत खराब गेहूं के संबंध में जब पनग्रेन एजेंसी के इंस्पेक्टर जसपाल सिंह से बात की गई तो उन्होंने गेहूं खराब होने की बात से इनकार करते हुए कहा कि उनका गेहूं नंबर-1 क्वालिटी का है। गेहूं चेक करने कोई अधिकारी नहीं आया उन्होंने कहा कि सेलर में लगे गेहूं को चेक करने के लिए कोई भी अधिकारी नहीं आया। जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग इस संबंधी बातचीत करने पर पूर्व विधायक एसआर कलेर और भाजपा के जिला प्रधान डॉक्टर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि गरीबों के लिये आने वाला अनाज यदि भ्रष्टाचार व लापरवाही के कारण काला और बदबूदार हो गया है तो सरकार को जल्द ही पारदर्शी और स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसे घोटाले रोके जा सकें। भाजपा ने की जांच कमेटी गठन करने की मांग उन्होंने इस मामले में लुधियाना के डीसी हिमांशु जैन से तुरंत जिला स्तरीय व राज्य स्तरीय संयुक्त जांच कमेटी का गठन करने की मांग के साथ साथ प्रभावित स्टॉक की क्वालिटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी रखी है। डॉ. शर्मा ने कहा कि रिश्वत के आरोपों की पुलिस या सीबीआई स्तर की जांच एफआईआर करवा के दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक व आपराधिक कार्रवाई करनी चाहिए और जल्द ही प्रभावित गरीबों के लिये दूसरे बढ़िया क्वालिटी के राशन का प्रबंध खुद उच्च अधिकारियों को करवाना चाहिए, ताकि किसी की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।

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